By एकता | Jan 13, 2026
भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई अपनी रफ़्तार के लिए जानी जाती है, लेकिन बीते कुछ दशकों में इस शहर ने बम धमाकों और आतंकवाद का खौफनाक दौर भी झेला है। आज मुंबई के लोगों के लिए 'सुरक्षा' केवल एक शब्द नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई है। भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता में आने के बाद 'राष्ट्र प्रथम' और 'आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाकर इस महानगर को एक मजबूत सुरक्षा कवच दिया है।
2014 से पहले का दौर मुंबई के लिए बहुत कठिन था। लोकल ट्रेनों के धमाके, झावेरी बाजार की घटना और 26/11 के भीषण आतंकी हमले ने शहर को हिला कर रख दिया था। उस समय आम मुंबईकर घर से निकलते वक्त अपनी सलामती को लेकर डरा रहता था। भाजपा का मानना है कि पिछली सरकारों की कमजोर नीतियों और खुफिया एजेंसियों की विफलता के कारण आतंकवादियों के हौसले बुलंद थे, जिससे शहर की सुरक्षा भगवान भरोसे रह गई थी।
सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने सुरक्षा को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया। शहर में सीसीटीवी का जाल बिछाने से लेकर तटीय सुरक्षा को मजबूत करने तक, हर काम में तेजी लाई गई। सरकार ने न केवल बाहरी आतंकियों, बल्कि शहर के अंदर छिपे खतरों पर भी कड़ा प्रहार किया। अवैध घुसपैठियों, जैसे कि बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं के खिलाफ अभियान चलाया गया, क्योंकि इनकी बढ़ती संख्या शहर में अपराध और कट्टरता को बढ़ावा दे रही थी। अतिक्रमण हटाकर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाया गया।
कानून का राज स्थापित करने की दिशा में प्रतापगढ़ में अफजल खान की कब्र के पास से अवैध निर्माण हटाना एक बड़ा कदम था। सालों से वहां वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा था, जिसे वोट बैंक की राजनीति के डर से पिछली सरकारें हटाने से बचती रहीं। लेकिन 2022 में महायुति सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए भारी सुरक्षा के बीच इस अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। इसी तरह, मीरा-भाईंदर के दंगों के आरोपियों और माहिम समुद्र में बनी अवैध मजार पर भी 'बुलडोजर' चलाकर सरकार ने साफ संदेश दिया कि अपराध और अतिक्रमण करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
भाजपा ने महाविकास आघाड़ी पर आरोप लगाया है कि वे वोट बैंक की राजनीति के लिए कट्टरपंथियों की अनदेखी करते हैं। पार्टी का कहना है कि जब भी घुसपैठियों पर कार्रवाई होती है, एमवीए के नेता मानवाधिकारों का बहाना बनाकर उनके बचाव में आ जाते हैं। भाजपा ने चेतावनी दी है कि ऐसी 'तुष्टिकरण की राजनीति' मुंबई को फिर से पुराने असुरक्षित दौर में धकेल सकती है।
आज मुंबई की स्थिति बदल चुकी है। अब त्योहार शांति से मनाए जाते हैं और पुलिस व सुरक्षा एजेंसियां पहले से कहीं ज्यादा मुस्तैद हैं। भाजपा की स्पष्ट नीति है कि अपराधी का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन अपराध को पनाह देना राष्ट्रद्रोह है। इसी इच्छाशक्ति के कारण आज एक आम मुंबईकर देर रात भी काम से घर लौटते समय खुद को सुरक्षित महसूस करता है।