एमएसआरटीसी हड़ताल: उच्च न्यायालय ने समिति को 20 दिसंबर को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 23, 2021

मुंबई| बंबई उच्च न्यायालय ने नकदी संकट से जूझ रहे महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) के कर्मचारियों का राज्य सरकार में विलय करने के मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति को सोमवार को निर्देश दिया कि वह 20 दिसंबर को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे।

न्यायमूर्ति पी.बी. वराले और न्यायमूर्ति एस. एम. मोदक की खंडपीठ ने एमएसआरटीसी के हड़ताली कर्मचारियों से अपने रुख पर पुनर्विचार करने और ड्यूटी पर वापस लौटने का भी अनुरोध किया क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में आम लोगों समेत बच्चों को सुविधाजनक और सस्ते परिवहन की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

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पीठ ने कहा, जिन कर्मचारियों, चालकों व कंडक्टर ने निगम को सहयोग देने की इच्छा जतायी है, उन्हें शहरी या ग्रामीण क्षेत्रों में बस चलाने की अनुमति दी जाएगी ताकि स्कूली छात्रों सहित आम जनता को परेशानी नहीं हो।

उन्होंने कहा कि अब स्कूल खुल चुके हैं, ऐसे में बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। पीठ ने कहा कि वह हड़ताली कर्मचारियों के सामने आने वाली समस्याओं से अवगत है, लेकिन मुद्दों और प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

अदालत एमएसआरटीसी द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें अदालत के आदेश के बावजूद काम पर नहीं लौटने पर हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ अवमानना ​​कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया गया था।

एमएसआरटीसी के वकीलों एस.यू. कामदार और जी.एस. हेगड़े ने सोमवार को अदालत को बताया कि कई बस डिपो के बाहर पथराव और हिंसा की घटनाएं हुईं, जहां कार्यकर्ता धरने पर बैठे थे। वकील ने कहा कि बड़ी संख्या में कर्मचारी डिपो के ठीक बाहर बैठते हैं और ड्यूटी पर लौटने के इच्छुक कर्मचारियों को रोकते हैं।

श्रमिक संघ के वकील गुणरतन सदावर्ते ने एमएसटीआरसी की दलील का विरोध किया और कहा कि कर्मचारी शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हैं। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक दलों के लोग कार्यकर्ताओं के नाम पर ऐसी हरकतें कर रहे हैं।

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