Health Tips: आयुर्वेद की इन 5 आदतों से बढ़ाएं Immunity, सर्दी-जुकाम और बीमारियां रहेंगी दूर

By अनन्या मिश्रा | Jan 13, 2026

पहले के समय में लोग कम बीमार पड़ते थे और शरीर में ताकत होती थी। उन लोगों की इम्यूनिटी मजबूत रहती थी और मानसिक रूप से भी लोग अधिक हेल्दी नजर आते थे। लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्थिति बिल्कुल उलट हो गई है। कम उम्र से ही लोगों को बीपी, पेट की बीमारी, डायबिटीज, तनाव और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से घिरे रहते हैं। खासकर सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार और स्किन संबंधी परेशानियां तेजी से बढ़ जाती हैं।

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कितने बजे उठें

आयुर्वेद में सुबह जागने का सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 04 से 04:30 बजे माना गया है। लेकिन सूर्योदय से पहले किसी भी हाल में बिस्तर छोड़ दें। नैतिक क्रियाएं करने के बाद धूप निकलने पर योग, हल्का व्यायाम और प्राणायाम आदि करना सर्दियों में बेहद फायदेमंद होता है। ऐसा करने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।

कैसी होनी चाहिए दिनचर्या

सर्दियों के मौसम में गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। आयुर्वेद में नहाने से पहले तिल या फिर सरसों के तेल से मालिश करना लाभकारी माना जाता है। इससे स्किन का रूखापन, जोड़ों के दर्द और थकान से राहत मिलती है। मालिश करने के बाद गुनगुने पानी से नहाने से शरीर तरोताजा महसूस करता है।

वहीं सुबह का नाश्ता 08 से 09 बजे के बीच करना चाहिए। सर्दियों में दूध, दलिया, घी लगी रोटी, पोहा, मूंग दाल का चीला और उपमा जैसी गर्म और पौष्टिक चीजों का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही अखरोट, बादाम और किशमिश जैसे सूखे मेवे डाइट में शामिल करना चाहिए, इससे आपके शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है।

लंच और डिनर

आपको दोपहर का खाना 12 से 1 बजे के बीच करना चाहिए। आयुर्वेद के मुताबिक इस समय पाचन अग्नि समय सबसे मजबूत होती है। दोपहर में घर का बना खाना खाएं। दोपहर के खाने में दाल, मौसमी सब्जियां, रोटी, चावल, घी और छाछ को शामिल करना चाहिए। सर्दियों में ज्वार, बाजरा और मक्के की रोटियां खाने से शरीर अंदर से मजबूत बनता है। वहीं शाम को 4 से 5 बजे के बीच हल्का नाश्ता कर सकते हैं। रात को हमेशा हल्का और समय पर 6 से 7 बजे तक भोजन कर लेना चाहिए।

रात में सोने का समय

हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, एक सामान्य व्यक्ति के लिए 7-8 घंटे की नींद जरूरी होती है। इसलिए रात को 10 बजे से पहले सो जाना चाहिए। क्योंकि सर्दियों में देर रात तक टीवी या मोबाइल देखने से शरीर कमजोर होता है। वहीं आयुर्वेदिक दिनचर्या को नियमित रूप से अपनाने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही पेट से जुड़ी बीमारियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती हैं। मानसिक तनाव, सुस्ती, थकान और चिड़चिड़ापन आदि से भी राहत मिलती है।

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