By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 23, 2022
निचली अदालत के जमानत याचिका खारिज करने के आदेश को चुनौती देते हुए खालिद के वकील ने दलील दी कि विशेष न्यायाधीश ने कहा था कि ये कृत्य भारत की एकता और अखंडता के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन उन लोगों द्वारा एक अन्यायपूर्ण कानून के खिलाफ था, जो देश का हिस्सा बनना चाहते हैं और यह किसी भी तरह से संप्रभु के खिलाफ नहीं है। वकील ने कहा कि यह उस हिंसा को अंजाम नहीं दिया जा रहा था, जिसके बारे में यूएपीए की धारा 15 (आतंकी कृत्य) विचार करती है। उन्होंने कहा, “ हम किसकी ओर इशारा कर रहे हैं? ये वे लोग हैं जिन्होंने कहा था कि सीएए भेदभावकारी है और वे भारत का हिस्सा बनना चाहते हैं।” वकील ने कहा कि प्रदर्शनकारी लोगों के कुछ वर्गों को नागरिकता देने या इससे इनकार करने के कथित भेदभावकारी मानदंड का विरोध कर रहे थे। पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए वकील ने कहा कि कानून एवं व्यवस्था में बाधा डालना भर आतंकवादी कृत्य नहीं है। सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति मृदुल ने कहा कि मिसाल के तौर पर, आतंकवाद एक ऐसा कृत्य है जो समाज की गति को भंग करने, समाज के एक वर्ग में डर की भावना पैदा करने की दृष्टि से किया जाता है और क्या दंगों के बाद किसी में कोई डर की भावना आई? इसपर खालिद के वकील ने हां में जवाब देते हुए कहा कि दंगों में सबसे ज्यादा प्रभावित समुदाय में डर की भावना है।