उपराष्ट्रपति पद की दौड़ शुरू, क्या राजनाथ सिंह या नीतीश कुमार बन सकते हैं जगदीप धनखड़ के उत्तराधिकारी?

By नीरज कुमार दुबे | Jul 22, 2025

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में नए नामों को लेकर अटकलों का दौर तेज हो गया है। चूंकि उपराष्ट्रपति का पद न केवल संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह राज्यसभा के सभापति के रूप में संसद में सरकार की रणनीति और स्थिरता से भी जुड़ा होता है, इसलिए सत्तारुढ़ गठबंधन इस पद पर किसी ऐसे चेहरे को बैठाना चाहेगा जो अनुभवी, भरोसेमंद और संतुलित हो। इसी संदर्भ में दो बड़े नाम चर्चा में हैं— रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

वहीं नीतीश कुमार का नाम इसलिए चर्चा में है क्योंकि वे इस समय एनडीए के महत्वपूर्ण साझेदार हैं। जदयू प्रमुख के तौर पर वे भाजपा के लिए बिहार में राजनीतिक संतुलन बनाए रखने वाले नेता हैं। अगर उन्हें उपराष्ट्रपति पद दिया जाता है तो बिहार में भाजपा पूर्ण प्रभुत्व की ओर बढ़ सकती है। साथ ही नीतीश कुमार को सम्मानजनक 'सेमी-रिटायरमेंट' का रास्ता मिल जाएगा। हालांकि नीतीश कुमार की छवि अत्यधिक अवसरवादी और बार-बार पाला बदलने वाले नेता की बन चुकी है। इसलिए भाजपा उन पर इतना बड़ा संवैधानिक दांव लगाने से हिचक सकती है। लेकिन इस बारे में चर्चा है कि भाजपा इस बार बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है इसलिए नीतीश से कोई डील हो चुकी है। पहले भी ऐसी खबरें सामने आई हैं कि नीतीश पूर्व में भी दिल्ली में किसी संवैधानिक पद को लेकर अपनी इच्छा जता चुके हैं।

अन्य संभावित चेहरे जो रेस में माने जा रहे हैं उनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी का नाम भी है। वह भाजपा का मुस्लिम चेहरा हैं। अल्पसंख्यक समुदाय को संदेश देने के लिए उनका नाम आगे बढ़ाया जा सकता है। नकवी को जब केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाया गया था तब भी उनका नाम उपराष्ट्रपति पद के लिए चर्चा में आया था। इसके अलावा, पूर्व राजनयिक और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी चर्चा में है। सिख समुदाय को साधने और अंतरराष्ट्रीय छवि के लिहाज से उनका नाम उभर सकता है।

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इसके अलावा, हाल के वर्षों में भाजपा ने वरिष्ठ नौकरशाहों को राज्यपाल या संवैधानिक पदों पर तवज्जो दी है। उपराष्ट्रपति पद के लिए भी ऐसा विकल्प अपनाया जा सकता है। इसके अलावा, किसी पूर्व राज्यपाल का नाम भी इस पद के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। हम आपको बता दें कि कई राज्यपालों का हाल ही में कार्यकाल समाप्त हुआ है और कुछ राज्यपाल ऐसे हैं जिनका कार्यकाल समाप्त हो गया है और वह दिल्ली के नये आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके अलावा किसी पूर्व राजनयिक का नाम भी आगे बढ़ाये जाने की चर्चा है। जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं और उन्हें सरकार का विश्वास प्राप्त है। हम आपको यह भी बता दें कि सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को निर्वाचक मंडल में बहुमत प्राप्त है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं।

यह भी माना जा रहा है कि यदि सत्तापक्ष मजबूत उम्मीदवार लाता है तो विपक्ष सांकेतिक उम्मीदवार ही खड़ा करेगा। लेकिन यदि विपक्ष को कहीं से बीच का रास्ता या सर्वसम्मति की संभावना दिखती है तो वे भी किसी गैर-राजनीतिक या शिक्षाविद् चेहरे का नाम ला सकते हैं। हालांकि विपक्ष की मौजूदा स्थिति बिखरी हुई है इसलिए उसकी भूमिका सीमित दिख रही है।

बहरहाल, राजनाथ सिंह और नीतीश कुमार दोनों के नाम प्रतीकात्मक रूप से चर्चा में जरूर हैं, लेकिन भाजपा की रणनीति के हिसाब से संभावना अधिक है कि कोई सजग, संगठन से जुड़ा, अपेक्षाकृत कम विवादित चेहरा उपराष्ट्रपति बने। इसमें मुख्तार अब्बास नक़वी, हरदीप पुरी या किसी वरिष्ठ नौकरशाह का नाम अधिक व्यवहारिक दिखता है। राजनाथ सिंह जैसे बड़े नेता को दिल्ली की राजनीति में बनाए रखना भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से अधिक ज़रूरी है। वहीं नीतीश कुमार को इतना बड़ा संवैधानिक पुरस्कार भाजपा इतनी आसानी से देगी, इसकी संभावना कम है।

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