आर्कियोलॉजी में हैं कॅरियर के अपार अवसर, जानें विस्तार से

By मिथिलेश कुमार सिंह | Jun 30, 2021

आर्कियो का मतलब इतिहास से है, यह तो हम सबको पता ही है, किन्तु यहाँ अभिप्राय ना केवल इतिहास है, बल्कि मनुष्य का विकास किस क्रम में हुआ, कहां हुआ, कैसे पुरानी सभ्यताएं जन्मीं, फली फूलीं, यह सारी चीज तो आर्कियोलॉजी में ही पढ़ाई जाती है।

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और इसी क्षेत्र का स्पेशलाइजेशन लेने वाला एक सफल आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में जाना जाता है। वास्तव में समूचे विश्व में शायद ही कोई ऐसी जगह होगी, जहां कभी ना कभी कोई ना कोई सभ्यता न रही हो। ऐसे में उन सभ्यताओं के बारे में, कल्चर के बारे में जानना ही आर्कियोलॉजिस्ट का प्रमुख कार्य है। देखा जाए तो अर्कियोलॉजिस्ट का काम बेहद विशाल है, और इसके अंदर ना केवल तार्किक सोच होनी चाहिए, बल्कि अलग-अलग भाषाओं का ज्ञान, एवं एनालिटिकल स्किल होना भी बेहद आवश्यक है।


इस क्षेत्र के लिए अगर जरूरी योग्यता की बात करें तो क्लासिकल लैंग्वेज, अर्थात पाली, अपभ्रंश, संस्कृत, प्राचीन अरेबियन लैंग्वेज  में से किसी की जानकारी तो आपको होना चाहिए, और इसी से कामयाबी की राह खुलती है। और हाँ! केवल पुरानी भाषाएँ सीखने से ही काम नहीं चलेगा, बल्कि अपने काम के प्रति समर्पण बेहद ज़रूरी है, क्योंकि अगर यह नहीं होगा तो आप बहुत जल्दी हार मान लेंगे। इसके साथ साथ कला की समझ, उसकी पहचान आपको काफी मदद करेगी। आखिर आपको सभ्यताओं की पहचान जो करनी है।


अवसरों की बात करें तो आर्कियोलॉजिस्ट काफी हॉट जॉब है और इसकी मांग सरकारी व निजी दोनों ही जगह है। आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया में आर्कियोलॉजिस्ट पोस्ट के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) प्रत्येक वर्ष परीक्षा आयोजित करता है। न केवल सेंटर में, बल्कि राज्यों में भी आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट ऐसे लोगों को हायर करते हैं। एजुकेशन फिल्ड में तो खैर, इसकी डिमांड रहती ही है। इसके लिए आप नेट क्वालीफाई करके अप्लाई कर सकते हैं।

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इस क्षेत्र से जुड़े कोर्सेज की बात करें तो पीजी, एमफिल, पीएचडी देश के अलग-अलग इंस्टिट्यूट से इसे आसानी से कर सकते हैं। एक्सपर्ट लेवल पर जायेंगे तो हेरिटेज मैनेजमेंट एवं आर्किटेक्चरल कंजरवेशन से सम्बंधित कोर्स अभी कम ही जगह मौजूद हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ आर्कियोलॉजी में दो साल का डिप्लोमा कोर्स भी मौजूद है, जिसमें आल इंडिया लेवल का एंट्रेंस एक्जाम देकर आप कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं।

 

अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षा के आधार पर इस कोर्स में दाखिला लिया दिया जाता है। 


दिल्ली स्थित गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध इंस्टीट्यूट, एवं दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज रिसर्च एंड मैनेजमेंट, आर्कियोलॉजी और हेरिटेज मैनेजमेंट में दो साल के मास्टर कोर्स मौजूद हैं, जिसे आप कर सकते हैं।

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सम्बंधित कोर्सेज करने के लिए आप अपनी पसंद का चुनाव कर सकते हैं, किन्तु देश में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU), दिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज रिसर्च एंड मैनेजमेंट, कर्नाटक यूनिवर्सिटी इससे सम्बंधित कोर्स कराते हैं, जबकि आर्कियोलॉजी के लिए विदेश में भी आप पढ़ाई कर सकते हैं। इसके लिए, आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, स्टॉनी ब्रुक यूनिवर्सिटी जैसे कई संस्थान आपकी मदद कर सकते हैं।


सैलरी की बात करें तो 25 हजार रुपए से इस क्षेत्र में लोग स्टार्ट करते हैं, फिर उसके बाद आदमी की योग्यता, अनुभव, इंटर पर्सनल स्किल और अवसरों की उपलब्धता उसकी सैलरी निश्चित करती है। जॉब की बात करें तो पुरालेखन विभाग, पुरातत्व विभाग, यूनिवर्सिटीज- शैक्षणिक संस्थान, प्राइवेट बिजनेस एजेंसी, ह्यूमन एंड हेल्थ सर्विस ऑर्गेनाइजेशन, आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया में आपके लिए तमाम अवसर सामने आ सकते हैं। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि आज यह चमकता हुआ कॅरियर बन गया है।


- मिथिलेश कुमार सिंह

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