By रेनू तिवारी | May 13, 2026
तमिलनाडु की राजनीति में बुधवार को उस समय भूचाल आ गया जब मुख्यमंत्री विजय के 'फ्लोर टेस्ट' (विश्वास मत) के दौरान विधानसभा के भीतर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। AIADMK के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) ने सत्तारूढ़ खेमे पर उनके विधायकों को खरीदने की कोशिश का गंभीर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है।
EPS के दावों के बीच पार्टी की अंदरूनी कलह भी पूरी तरह से सतह पर आ गई। जहाँ एक तरफ पलानीस्वामी विरोध पर अड़े थे, वहीं पार्टी के दिग्गज नेता SP वेलुमणि, जिन्हें लंबे समय से 'विरोधी' गुट का नेतृत्व करने वाला माना जा रहा है, ने सदन में चौंकाने वाला रुख अपनाया। वेलुमणि ने EPS के स्टैंड से अलग हटकर खुले तौर पर मुख्यमंत्री विजय का समर्थन करने का वादा किया, जिससे AIADMK में स्पष्ट विभाजन की स्थिति बन गई है।
हाल ही में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले विजय के लिए यह फ्लोर टेस्ट उनकी पहली बड़ी अग्निपरीक्षा है।
समर्थन का दावा: मुख्यमंत्री के पास फिलहाल 119 विधायकों का समर्थन हासिल है।
मौजूदा स्थिति: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री के समर्थन में फिलहाल AIADMK का कोई भी विधायक औपचारिक रूप से शामिल नहीं था, लेकिन वेलुमणि के बयान ने समीकरणों को पेचीदा बना दिया है।
जैसे ही EPS ने 'कैश की पेशकश' का मुद्दा उठाया, सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। सत्तारूढ़ TVK के सदस्यों ने इन आरोपों का कड़ा विरोध किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIADMK के भीतर की यह खींचतान न केवल पार्टी के भविष्य के लिए खतरा है, बल्कि यह राज्य की राजनीति में एक नए ध्रुवीकरण की शुरुआत भी हो सकती है।
फिलहाल सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ी हुई है और सभी की नजरें अंतिम मतदान (वोटिंग) पर टिकी हैं कि क्या EPS अपने कुनबे को एकजुट रख पाते हैं या नहीं।
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