PV Narasimha Rao Birth Anniversary: सियासत के वो 'चाणक्य' जो राजनीति छोड़ते-छोड़ते बन गए देश के Prime Minister

By अनन्या मिश्रा | Jun 28, 2026

आज ही के दिन यानी की 28 जून को देश के 9वें प्रधानमंत्री रहे पीवी नरसिम्हा राव का जन्म हुआ था। वह एक ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जो अचानक की प्रधानमंत्री बन गए। उन्होंने कभी खुद भी यह चाहत नहीं रखी थी कि वह देश के प्रधानमंत्री बनें। नरसिम्हा राव स्वतंत्रता सेनानी के अलावा वकील, 17 भाषाओं के ज्ञाता, विदेश नीति में दक्ष, अर्थशास्त्री और कुशल राजनेता थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर पीवी नरसिम्हा राव के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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सियासी सफर

कांग्रेस से जुड़कर पीवी नरसिम्हा राव राजनीति में आए और उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला। साल 1962 से लेकर 64 तक आंध्र प्रदेश तक कानून व सूचना मंत्री, फिर 1964 से 67 तक कानून व विधि मंत्री, साल 1967 में स्वास्थ्य व चिकित्सा मंत्री और 1968 से लेकर 1971 तक शिक्षामंत्री रहे।

वहीं साल 1971 से लेकर 1973 तक नरसिम्हा राव आंध्र प्रदेश के सीएम बने। इसके बाद वह इंदिरा गांधी और फिर राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और गृह मंत्री रहे। साल 1991 में वह देश के पहले दक्षिण भारतीय प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त करने वाले राजनेता बने।

गांव जाने की तैयारी

साल 1991 के चुनाव के पहले तक नरसिम्हा राव 69 साल के हो चुके थे। वहीं राजीव गांधी भी कांग्रेस के लिए युवाओं को मौका देने लगे थे। ऐसे में नरसिम्हा राव ने राजनीति से दूर जाने का फैसला किया। नरसिम्हा राव की प्रधानमंत्री बनने की कोई महत्वकांक्षा नहीं दिखाई दी।

ऐसे बने प्रधानमंत्री

साल 1991 में देश में आम चुनाव चल रहे थे। भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला था। वहीं 21 मई को राजीव गांधी चेन्नई के पास श्रीपेराम्बदूर में एक आम सभा को संबोधित करने गए। लेकिन मंच पर पहुंचने से पहले ही एक आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की मौत हो गई। इस घटना से देश और चुनाव दोनों की तस्वीर बदल गई। पूर्व अनुमानों में कांग्रेस पिछड़ रही थी, लेकिन इस हादसे के बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि पार्टी को बहुमत नहीं मिला, लेकिन सरकार बनाने में सफल रही।

वहीं इस हादसे के बाद कांग्रेस के सामने नेतृत्व का संकट खड़ा हो गया। राहुल और प्रियंका गांधी छोटे थे और पत्नी सोनिया गांधी राजनीति के लिए तैयार नहीं थी। ऐसे में वरिष्ठता के आधार पर नरसिम्हा राव के नाम पर सर्वानुमति बनी। इस तरह से वह देश के 9वें प्रधानमंत्री बने। पीएम रहते हुए उन्होंने अल्पमत के साथ पार्टी के अंदर चलने वाले गतिरोधों को भी संभाला। शरद पवार और अर्जुन सिंह जैसे नेताओं ने पार्टी छोड़ दी, लेकिन फिर भी नरसिम्हा राव ने अल्पमत सरकार के 5 साल पूरे किए।

मृत्यु

वहीं 23 दिसंबर 2004 को पीवी नरसिम्हा राव का निधन हो गया था।

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