26 साल पुरानी घटना को फिर दोहराएगा चीन? ताइपे के ऊपर दागी थी परमाणु मिसाइल, ताइवान के तत्कालीन राष्ट्रपति के US दौरे से था बौखलाया

By अभिनय आकाश | Aug 06, 2022

अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेंजेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा से चीन बौखलाया हुआ है। नैंसी की ताइवान यात्रा से अमेरिका और चीन के बीच तनाव अपने चरम पर है। ईस्टर्न थियेटर कमांड की वॉर ड्रिल से युद्ध जैसे माहौल बन गए हैं। ताइवान के पास चीन की लाइव फायर ड्रील की गई है। चीन ने सात जगहों से ताइवान की घेराबंदी की है। 25 साल बाद चीन की तरफ से इस तरह की वॉर एक्सरसाइज को अंजाम दिया गया है। इससे पहले 1996 में चीन ने ताइवान के पास इसी तरह की तैनाती की थी। लेकिन उसके ढाई दशक बाद इससे कही ज्यादा बड़ी और व्यापक चीन की वॉर एक्सरसाइज ताइवान के चारों तरफ देखने को मिल रही है। लाइव फायर ड्रील की समयसीमा 4 से 6 अगस्त तक की थी। 

जापान ने दी चेतावनी 

ओकिनावा द्वीप के पास मिसाइलें दागना चीन को महंगा पड़ सकता है। जापान ने ताइवान के पास चल रहे चीन के युद्धाभ्यास पर कड़ा ऐतराज जताया है। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने इस क्षेत्र में चीन के सबसे बड़े लाइव-फायर अभ्यास की निंदा की है। उन्होंने चीन की बारूदी साजिश को क्षेत्रीय शांति और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। जापान का मानना है कि ताइवान के पास युद्धाभ्यास गंभीर समस्या बन सकता है। जानकारों का मानना है कि अगर चीन और ताइवान युद्ध नहीं हुआ तो जापान और उसके मित्र देश उसकी घेराबंदी करेंगे। बीते दिनों चीन की तरफ से सात बेलेस्टिक मिसाइलें दागी गईं जिसमें से पांच जापानी क्षेत्र में जाकर गिरी। जिसके बाद जापान ने चीन को चेतावानी देते हुए कहा कि उसे ताइवान के पास अपने सैन्य अभ्यास को तत्काल रोक देना चाहिए। बता दें कि चीन जो नैसैनिक अभ्यास कर रहा है उसकी जद में कुछ दक्षिण पश्चिम जापान द्वीप भी आ रहे हैं। जापान के शाकीसीमा, योनागोनी, ईशीगाकी, मेयाकू द्वीप पर चीनी सैन्य अभ्यास का असर पड़ सकता है। योनागोनी और मेयाकू द्वीप ताइवान से केवल 110 किलोमीटर की दूरी पर हैं। ये ग्राउंड सेल्फ डिफेंस फोर्स के बेस हैं। 

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लाइव-फायर एक्सरसाइज क्या हैं?

ये मुख्य रूप से सैन्य कर्मियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले अभ्यास हैं, जिसमें गोला बारूद, रॉकेट और मिसाइलों को लाइव फायर कर उसकी ताकत जांची जाती है। सेनाएं जब भी एक्सरसाइज के दौरान लाइव गोला-बारूद को फायर करती है, तो उसे लाइव फायर ड्रिल का नाम दिया जाता है। यह परीक्षण ऐसे क्षेत्र में किए जाते हैं, जहां कोई हताहत न हो सके। लाइव-फायर प्रशिक्षण के दौरान, सैनिकों को नकली युद्ध स्थितियों में रखा जाता है और उन्हें अपने हथियारों और उपकरणों (जैसे जहाज, विमान, टैंक और ड्रोन) का उपयोग करने का अवसर दिया जाता है। इस तरह के अभ्यास सैनिकों की युद्ध की तैयारी, इकाइयों के सामंजस्य को बनाए रखने और अपने हथियारों और उपकरणों का सही ढंग से उपयोग करने की क्षमता में विश्वास पैदा करने में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें वाहनों और हथियार प्रणालियों (जैसे अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, विमान-रोधी हथियार) की प्रभावशीलता का परीक्षण भी शामिल है, ताकि हथियारों के पूरी तरह से चालू होने से पहले किसी भी खामियों को दूर किया जा सके। चीन की तरफ से किए जा रहे इस वॉर एक्सरसाइज दूसरा मकसद ताइवान और अमेरिका को चीन की नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन करना है।

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क्या है इस ड्रील का उद्देश्य

ये ड्रिल रंगरूटों को अपने अपने हथियारों के आदी होने का अवसर प्रदान करता है। इससे वे जानते हैं कि इन बड़े-बड़े हथियारों को कैसे ऑपरेट किया जाता है। दूसरा यह कि ऐसे ड्रिल में सैनिक दुश्मन की जवाबी कार्रवाई की चिंता किए बगैर लाइव गोला-बारूद, रॉकेट और मिसाइलों को फायर कर सकते हैं। इससे सैनिक यह भी सीखते हैं कि वास्तव में बड़े हथियारों का इस्तेमाल कैसे और कब किया जाए और इसका प्रभाव क्या होता है। चीन ने यह भी जताया कि कि वह अमेरिकी नेताओं की ताइवान यात्रा को लेकर काफी संवेदनशील है।

26 साल पहले की याद हुई ताजा

साल 1996 में भी ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका आमने सामने आ गए थे। विडंबना ये है कि वो संकट भी एक विवादस्पद यात्रा से शुरू हुआ था। हालांकि उस वक्त ताइवान के नेता ही अमेरिका के दौरे पर गए थे। पूर्व राष्ट्रपति ली टेंग की अमेरिका यात्रा से चीन इस कदर बौखला गया था कि उसने ताइवान की सीमाओं की परवाह न करते हुए तुरंत ही युद्धभ्यास शुरू कर दिया था। द्वीप के एयर स्पेस और समुद्री रास्तों को भी कई घंटो तक के लिए बंद करना पड़ा था।  

चीन ने दागीं थी मिसाइलें

ताइवान के तत्कालीन राष्ट्रपति की अमेरिका यात्रा और ताइवान को अलग देश के नाम से संबोधित किए जाने से नाराज ड्रैगन ने ताइवान के बेहद नजदीक ही मिसाइल परीक्षण शुरू कर दिया था। इसके साथ ही ताइवान के सीमावर्ती इलाके में 1 लाख सैनिकों की तैनाती कर दी गई थी। 18 अगस्त को चीन ने परमाणु हथियारों का परीक्षण भी किया था। इन परीक्षणों के दौरान चीन की कई मिसाइलें ताइवान के मिसाइलें काऊशुंग और कीलुंग के बंदरगाह शहरों से सिर्फ 25 मील की दूरी पर गिरीं। हद तो तब हो गई जब 9 मार्च, 1996 को चीन की परमाणु हमला करने में सक्षम डोंग फेंग 15 बैलिस्टिक मिसाइल ने ताइवान के ऊपर से उड़ान भरते हुए उसके पूर्वी तट से 19 मील की दूरी पर लैंड किया। -अभिनय आकाश

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