कोरोना काल में सारे त्योहार फीके जा रहे हैं (व्यंग्य)

By तारकेश कुमार ओझा | Jul 21, 2020

जो बीत गई उसकी क्या बात करें। लेकिन जो बीत रही है उसे अनदेखा भी कैसे और कब तक करें। ऐसा डरा-सहमा सावन जीवन में पहली बार देखा लोग पूछते हैं... क्या कोरोना काल में इस बार रक्षाबंधन और गणेशोत्सव भी फीके ही रह जाएंगे। यहां तक कि खतरनाक वायरस की अपशकुनी काली छाया महापर्व दशहरा और दीपोत्सव पर भी मंडराती रहेगी।

इसे भी पढ़ें: आया मौसम परीक्षा परिणामों का (व्यंग्य)

भीड़ भरे बाजार में फुटपाथ पर दुकान करने वालों का तो मानो यक्ष प्रश्न ही था... क्या भइया, फिर लॉकडाउन होगा क्या, सवाल पूछने वालों का बिन मांगा जवाब भी मौजूद था... क्या मरण है बोलिए तो, ए साल धंधा- पानी सब चौपट , क्या होगा भगवान जाने...!! महामारी के इस दौर में बुजुर्गों का अपना ही दर्द महसूस हुआ। जिसकी ओर हमारा ध्यान कम ही जाता है। थाने के नजदीक व्यस्ततम चौराहे के पास दो बुजुर्ग आहिस्ता-आहिस्ता बातचीत कर रहे हैं... क्यों इस खतरनाक रोग की कोई वैक्सीन ईजाद हुई... दूसरे ने निराश स्वर में जवाब दिया... अभी तक तो नहीं...!! 

- तारकेश कुमार ओझा

लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ठ पत्रकार हैं।

प्रमुख खबरें

पूर्व IAS Divya Mittal का Mirzapur में भव्य स्वागत, समर्थकों ने लगाए जिंदाबाद के नारे

सऊदी अरब ने Riyadh airport को बंद रखने की अवधि बढ़ाई, हूती मिसाइल हमले में हुई थी 12 की मौत

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन, कॉजपा ने दी देशव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी

BSNL ने स्वदेशी 5G सेवा की तैयारी तेज की, 4G विस्तार के साथ India Mobile Congress में घोषणा