'वंदे मातरम' के सिर्फ दो पद गाने के फैसले पर कांग्रेस अडिग, BJP का विपक्ष पर हमला- 'ये नई मुस्लिम लीग है'

By रेनू तिवारी | Aug 20, 2026

राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर छिड़ा राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह भविष्य में अपने सभी पार्टी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के केवल शुरुआती दो पद (stanzas) ही गाएगी। यह फैसला नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की चार घंटे चली बैठक में लिया गया। कांग्रेस के इस कदम पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तीखा हमला बोला है और पार्टी पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है।

राज्यसभा सदस्य ने कहा, "'भारत माता' के पवित्र आह्वान का यह अपमान उन हज़ारों शहीदों का अनादर है, जिन्होंने इसी गीत को अपने मन में बसाकर देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। कांग्रेस ने अब (वंदे मातरम के) अपमान को एक प्रस्ताव का रूप दे दिया है। उसकी वर्किंग कमेटी ने तय किया है कि कांग्रेस के मंचों पर वंदे मातरम के सिर्फ़ शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे।"

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उन्होंने आगे कहा, "कांग्रेस आज नई मुस्लिम लीग बन गई है... आज वही अपमान कांग्रेस की नीति बन गया है। यह सिर्फ़ राजनीतिक बचाव नहीं है, बल्कि उस वोट बैंक की भूख का सबूत है, जिसकी वेदी पर कांग्रेस ने बार-बार देश के आत्म-सम्मान को गिरवी रखा है।"

'वंदे मातरम' पर बहस

BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने सभी सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' का पूरा संस्करण गाना अनिवार्य कर दिया है, जिस कदम की कांग्रेस ने आलोचना की है। कांग्रेस का आरोप है कि BJP ने राष्ट्रीय गीत गाने को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है, और उसने दोहराया है कि वह इसके सिर्फ़ शुरुआती दो पद ही गाएगी।

यह बहस 15 अगस्त को फिर से शुरू हुई, जब कांग्रेस मुख्यालय का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें 'वंदे मातरम' का पूरा संस्करण गाया जा रहा था। हालांकि, बीजेपी ने आरोप लगाया कि राज्यसभा सदस्य सोनिया गांधी ने कार्यक्रम के दौरान पूरा वर्शन बजाने से रोकने की कोशिश की, जबकि कांग्रेस ने साफ़ किया कि CPP चेयरपर्सन सिर्फ़ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं। तब से, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित 'वंदे मातरम' की बात करें तो इसे पहली बार 7 नवंबर, 1875 को साहित्यिक पत्रिका 'बंगदर्शन' में प्रकाशित किया गया था।

 

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