अपने अतीत से कुछ नहीं सीखती कांग्रेस, राजस्थान में दोहरा रही मध्य प्रदेश वाली गलती

By अंकित सिंह | Jul 13, 2020

राजस्थान के हालिया घटनाक्रमों को देखें तो ऐसा लगता है कि कांग्रेस अपनी पिछली गलतियों से कुछ सीख ही नहीं रही है। तभी तो एक के बाद एक पार्टी में वही चीजें दिखाई दे रही है जो पहले घट चुकी है। फिलहाल राजस्थान में भी वही हो रहा है जो आज से 3 महीने पहले मध्यप्रदेश में हो चुका है। पर आलाकमान फिलहाल खामोशी से तमाम घटनाक्रम को देख भर रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि मानो उसके हाथ में तो कुछ है ही नहीं। पार्टी में सर्वे सर्वा गांधी परिवार भी वर्तमान राजनीतिक हालात पर खुलकर सामने नहीं आ रहा है। हां, शीर्ष नेतृत्व इस समस्या को सुलझाने के लिए नेताओं की फौज जरूर तैनात कर रही पर यह काम नहीं आ रहा। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आंतरिक कलह और खींचतान कांग्रेस का स्थाई भाव बन गया है। 

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पर ऐसा नहीं है कि सिर्फ इन्हीं 2 राज्यों में ऐसी समस्याएं है। महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी लगातार हम इस तरीके की मनमुटाव की खबरें देखते रहते है। कांग्रेस में युवा नेताओं की ऐसी फौज है जो आलाकमान और ओल्ड बिग्रेड से समय-समय पर नाराज दिखते है। मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद, संजय निरुपम जैसे नेता भी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके है। लेकिन आलाकमान की चुप्पी कहीं ना कहीं कांग्रेस की कमजोरी को दर्शाती है। पार्टी खुद को दुरुस्त करने की बजाय भाजपा पर आरोप मढ़ने में ज्यादा विश्वास करती है। तभी तो अपने घर में नाराज हो रहे नेताओं को मनाने की बजाय कांग्रेस प्रवक्ता भाजपा को जिम्मेदार ठहराने लगते हैं।

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ऐसा लगता है कि कांग्रेस के लिए नेताओं का पार्टी छोड़ जाना अब मायने नहीं रखता। पार्टी ना तो इससे चिंतित दिखती है और ना ही इसे रोकने के लिए कोई कार्य करती है। पार्टी के ऐसे कई युवा नेता कांग्रेस का हाथ छोड़ भाजपा का दामन थाम चुके हैं। लेकिन कांग्रेस यथास्थिति को समझने की बजाय भाजपा को ही दोष देने में लगी हुई है। पार्टी की गुटबाजी कम करने के बजाए भाजपा में दोष निकालने में जुटी हुई है। कांग्रेस में यह टकराव लगातार उसे उसके बुरे दौर की ओर पहुंचा रहा है फिर भी पार्टी इससे उबरने की कोशिश करती नहीं दिख रही है।

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