Congress, SAD ने सेना में सिख सैनिकों के लिए हेलमेट शामिल करने के कथित कदम का विरोध किया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 14, 2023

पंजाब में विपक्षी कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने सेना में सिख सैनिकों के लिए हेलमेट शामिल करने के कथित कदम का शुक्रवार को कड़ा विरोध किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सिखों ने 1962, 1965, 1971 की जंग और कारगिल की लड़ाई बहादुरी से लड़ी, लेकिन तब हेलमेट का कोई मुद्दा नहीं उठा।

बादल ने इस कदम को भड़काने वाला और असंवेदनशील बताते हुए यहां एक बयान में कहा कि यह न केवल इतिहास में अभूतपूर्व है बल्कि सभी तर्कों को भी खारिज करता है क्योंकि सिख सैनिक पूर्व में देश की रक्षा में हमेशा सबसे आगे रहे हैं और उन्हें ऐसे हेलमेट की कभी जरूरत महसूस नहीं हुई। उन्होंने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, ‘‘यदि समाचार पत्रों की खबर सहित विभिन्न स्रोतों से सामने आने वाली जानकारी वास्तव में सच हैं, तो हमें आश्चर्य है कि सरकार ने इस तरह की महत्वपूर्ण भावनात्मक और धार्मिक संवेदनशीलता के मामले पर सिख सिद्धांतों, मानदंडों और प्रथाओं की इस तरह की उपेक्षा की।’’

उन्होंने हालांकि, उम्मीद जतायी कि प्रधानमंत्री इस मामले को देखेंगे और आदेश देंगे कि इस संबंध में किसी भी प्रस्ताव को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। बादल ने कहा, ‘‘यहां तक कि अंग्रेजों ने भी सिख सैनिकों पर इस तरह के फैसले को नहीं थोपा था। सिख कट्टर देशभक्त लोग हैं और उन्होंने 1948, 1962, 1965 और 1971 के युद्धों के साथ-साथ कारगिल सहित अन्य सभी सैन्य अभियानों में भी आगे रहे हैं।’’ बादल ने सवाल किया, ‘‘यह अचानक घटनाक्रम क्यों हुआ जब किसी सिख को कभी भी इस तरह की सुरक्षा की आवश्यकता महसूस नहीं हुई?’’

उन्होंने कहा कि उन्हें अभी भी उम्मीद है कि इस संबंध में खबरें सच नहीं हैं। प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में, बादल ने इस संबंध में रक्षा मंत्रालय के कथित कदम पर अकाल तख्त के जत्थेदार हरप्रीत सिंह द्वारा व्यक्त की गई गंभीर चिंता की ओर भी उनका ध्यान आकर्षित किया। शिरोमणि अकाली दल के एक बयान के अनुसार, बादल मीडिया के एक वर्ग में आयी उन खबरों का जिक्र कर रहे थे, जिनमें कहा गया था कि रक्षा मंत्रालय ने सिख सैनिकों के लिए इन तथाकथित विशेष रूप से डिजाइन किए गए हेलमेट की थोक खरीद के लिए पहले ही ऑर्डर दे दिया है। अकाल तख्त के जत्थेदार, ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने भी कथित कदम की आलोचना करते हुए कहा था कि यह सिखों की पहचान पर हमला है।

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