Election Commission के SIR अभियान में करोड़ों नाम हटाने पर Congress का अमित शाह पर बड़ा आरोप

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 20, 2026

कांग्रेस ने रविवार को निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि एसआईआर वास्तव में मतदाताओं के नाम हटाने की एक बड़े पैमाने की ‘‘शाह इंस्टीगेटेड रिमूवल’’ (शाह के इशारे पर मतदाताओं के नाम हटाने की) प्रक्रिया तथा ‘‘संविधान पर हमला’’ है। कांग्रेस ने कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर हटाए गए नामों में सबसे अधिक संख्या समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे कमजोर तथा वंचित वर्गों से आने वाले मतदाताओं की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने जून 2025 में बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की पहले चरण की प्रक्रिया शुरू की थी।

रमेश ने कहा कि तीसरे चरण की शुरुआत 2026 के मध्य में 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में हुई। उन्होंने बताया कि तीसरे चरण के दौरान अब तक 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कुल 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ के नाम हटा दिए गए हैं। रमेश ने कहा, ‘‘नाम हटाए जाने की दर 17 प्रतिशत से अधिक है।

इसके अलावा 5.43 करोड़ मतदाताओं को अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं, ताकि मतदाता सूची में उनके नाम बरकरार रखे जा सकें। इससे नाम हटाए जाने का जोखिम और 15 प्रतिशत बढ़ जाता है। यह असामान्य रूप से बड़ा अनुपात है, जो पूरी एसआईआर प्रक्रिया में संरचनात्मक खामियों को दर्शाता है।’’ उन्होंने सवाल किया कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद भी इतने अधिक मतदाताओं को अपने नाम ‘‘सत्यापित’’ कराने की जरूरत कैसे पड़ रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह कुल 32 प्रतिशत यानी करीब हर तीन में से एक मतदाता का नाम या तो हटा दिया गया है या उसके हटाए जाने का खतरा है। इस संबंध में राज्यों की स्थिति इस प्रकार है : दिल्ली (53.73 प्रतिशत), चंडीगढ़ (52.58 प्रतिशत), झारखंड (39.57 प्रतिशत), उत्तराखंड (35.71 प्रतिशत), मेघालय (35.36 प्रतिशत), महाराष्ट्र (33.88 प्रतिशत), तेलंगाना (48.90 प्रतिशत), कर्नाटक (27.6 प्रतिशत), हरियाणा (37.5 प्रतिशत), ओडिशा (23.67 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (21.17 प्रतिशत) और पंजाब (15.23 प्रतिशत)। कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड में जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है, उनकी सूची सार्वजनिक कर दी गई है, ताकि मतदाता उसमें अपना नाम देख सकें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली ने यह सूची 19 सितंबर 2026 को सार्वजनिक की और वह भी केवल जन दबाव के कारण।

भाजपा शासित अन्य राज्यों के साथ-साथ पंजाब ने अब तक ऐसा नहीं किया है।’’ रमेश ने आरोप लगाया कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर हटाए गए नामों में मुख्य रूप से समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे कमजोर तथा वंचित वर्गों के मतदाता शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर बड़े राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से पुरुषों की तुलना में महिलाओं के अधिक नाम हटाए गए हैं। रमेश ने कहा कि एसआईआर के जरिए सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है और मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाने का बोझ नागरिकों पर डाल दिया है, जबकि संभव है कि इनमें से कुछ दस्तावेज सरकार ने उन्हें कभी जारी ही न किए हों।

उन्होंने कहा कि ऐसी जांच प्रक्रिया, जिसे देश के अधिकांश नागरिक पूरा ही नहीं कर सकते, दरअसल लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने का माध्यम बनकर रह जाती है। कांग्रेस महासचिव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘एसआईआर वास्तव में मतदाताओं को हटाने की एक बड़े पैमाने की ‘शाह इंस्टीगेटेड रिमूवल’ प्रक्रिया है। यह हमारे संविधान पर हमला है।

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