14 साल की उम्र में मचाया 'गदर', फिर भी क्यों Team India में नहीं हो सकती Vaibhav Sooryavanshi की Entry?

By अंकित सिंह | Feb 07, 2026

इंग्लैंड के खिलाफ अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में वैभव सूर्यवंशी के तूफानी प्रदर्शन की गूंज क्रिकेट जगत में अभी भी गूंज रही है। 80 गेंदों पर उनके 175 रन सिर्फ एक पारी नहीं थी, बल्कि रिकॉर्डों पर उनका दबदबा कायम कर दिया। 15 छक्कों और ऐसे स्ट्राइक रेट के साथ जिसने किसी भी फाइनल मुकाबले को धराशायी कर दिया, बिहार के इस 14 वर्षीय खिलाड़ी ने प्रशंसकों के मन में एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है: अगर वह इंग्लैंड के सर्वश्रेष्ठ युवा खिलाड़ियों को ध्वस्त करने और आईपीएल में शतक लगाने में सक्षम हैं, तो उन्हें भारतीय वरिष्ठ टीम में क्यों नहीं रखा गया है? 

बिहार के लिए चाहे वैभव कितने ही 36 गेंदों में शतक बना लें या राजस्थान रॉयल्स के लिए आईपीएल में कितने ही गेंदबाजों को परेशान कर दें, वरिष्ठ राष्ट्रीय चयनकर्ताओं के हाथ 27 मार्च 2026 तक बंधे हुए हैं। वरिष्ठ टीम के लिए उनकी उम्र अभी कम है, और विडंबना यह है कि भारत की अंडर-19 टीम के साथ उनका कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है। बीसीसीआई अंडर-19 विश्व कप के लिए एक सख्त वन-टूर्नामेंट नियम लागू करता है। इस नीति का उद्देश्य आयु वर्ग के विशेषज्ञों को रोकना और नई प्रतिभाओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

इसे भी पढ़ें: बिहार के लाल Vaibhav Sooryavanshi ने रचा इतिहास, CM Nitish Kumar ने की तारीफ, Sehwag भी हुए गदगद

2026 विश्व कप में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब जीतने के बाद वैभव 2028 या 2030 के इन बड़े टूर्नामेंटों में वापसी नहीं कर सकते, भले ही दोनों ही संस्करणों में उनकी उम्र अंडर-19 ही रहेगी। "सूर्यवंशी तूफान" फिलहाल घरेलू और फ्रेंचाइज़ क्रिकेट की सीमाओं तक ही सीमित है। हालांकि, उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। 2026 के अंत में भारत के व्यस्त क्रिकेट शेड्यूल को देखते हुए, जैसे ही उनकी उम्र 15 साल होगी, उनके नाम की नीली जर्सी लगभग तुरंत ही छप जाएगी।

प्रमुख खबरें

Kirit Somaiya मुंबई एयरपोर्ट के पास मस्जिद हटाने की मांग पर निकालेंगे हथौड़ा रैली

Ayodhya Deepotsav 2024: सरयू के 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य तय

PM Modi और Donald Tusk की बैठक, 2030 तक व्यापार दोगुना करने पर बनी सहमति

Pushkar Singh Dhami ने Rekha Arya विवाद पर कहा शादी के 22 साल बाद आरोप क्यों निष्पक्ष जांच जरूरी