By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 18, 2026
दिल्ली पुलिस ने पांच राज्यों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर ठगी के मामलों में समय रहते हस्तक्षेप कर वरिष्ठ नागरिकों सहित कई लोगों को जालसाजों के खातों में अतिरिक्त पैसे भेजने से रोककर 1.53 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान को टाल दिया। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि आईएफएसओ इकाई के वित्तीय निगरानी सेल (एफएमसी) की ‘प्रोएक्टिव विक्टिम आइडेंटिफिकेशन एंड प्रोटेक्शन टीम’ ने संदिग्ध लेनदेन का पता लगाते हुए पीड़ितों से संपर्क किया और अतिरिक्त भुगतान रोकने के लिए बैंकों तथा राज्य पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया।
इसके बाद एक व्यक्ति ने दरियागंज थाने का आईपीएस अधिकारी बनकर पीड़ित को वीडियो कॉल की और उन्हें धनशोधन के एक मामले में गिरफ्तार करने की धमकी दी। पीड़ित ने डर के मारे अपने बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के खातों से कई बार पैसे स्थानांतरित किए। इस संबंध में 29 सितंबर को एक ई-प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस टीम ने जब पैसों के लेनदेन का पता लगाया, तो सामने आया कि राशि का एक हिस्सा हैदराबाद के एक बैंक खाते में पहुंचा था, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ (धोखाधड़ी के पैसों को खपाने वाले खाते) के रूप में किया जा रहा था।
मामले के विश्लेषण से पता चला कि 21 से 29 सितंबर के बीच पांच अन्य पीड़ितों ने भी इसी खाते में पैसे भेजे थे। इससे टीम को उन लोगों की पहचान करने में मदद मिली, जिन्हें जालसाज अब भी निशाना बना रहे थे। पांचों मामलों में कुल मिलाकर 1.53 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान को होने से रोका गया।
इनमें दिल्ली में 3.48 लाख रुपये, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 10-10 लाख रुपये, महाराष्ट्र में 55 लाख रुपये और गुजरात में 75 लाख रुपये के संभावित नुकसान को टाला गया।