By अनन्या मिश्रा | Oct 05, 2026
देवभूमि उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर है, जहां पर एक ऐसा मंदिर है, जो बेहद प्रसिद्ध है। धारी देवी मंदिर, मुख्य रूप से मां काली को समर्पित है। यह मंदिर क्षेत्र में पूजनीय होने के साथ-साथ भारत के अन्य हिस्सों में भी काफी प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है। धारी देवी मंदिर को चार धाम का रक्षक भी कहा जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।
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स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर में स्थित धारी देवी की प्रतिमा दिन में 3 बार अपना रूप बदलती है। सुबह के समय छोटी बालिका, दिन में महिला और शाम को उनका स्वरूप बूढ़ी महिला के रूप में दिखाई देता है।
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक एक बार भीषण बाढ़ की वजह से मंदिर बह गया था और धारी देवी की मूर्ती धारो नामक गांव के पास एक चट्टान के पास रुक गई थी। वहीं गांव वालों को मूर्ति से विलाप की आवाज सुनाई दी और इस आवाज ने उनको मूर्ति को स्थापित किए जाने के निर्देश दिए। तब गांव वालों ने मिलकर फिर उसी स्थान पर धारी माता की मूर्ति को स्थापित किया।
वहीं अन्य मान्यता के अनुसार, साल 2013 में केदारनाथ बाढ़ से ठीक पहले किसी काम के कारण धारी देवी मंदिर को स्थानांतरित किया गया था। स्थानीय लोगों का मानना है कि धारी देवी के प्रकोप की वजह से ही बाढ़ आई थी। फिर बाद में उसी जगह पर मंदिर का निर्माण कर देवी की मूर्ति को स्थापित किया। इसलिए धारी देवी मंदिर की इतनी अधिक मान्यता है।
धारी देवी मंदिर में देवी को 'उत्तराखंड की रक्षक देवी' और चारों धाम की संरक्षक के रूप में पूजा जाता है।
इस मंदिर को 108 शक्ति स्थलों में से एक माना जाता है।
धारी देवी की मूर्ति का सिर्फ ऊपरी आधा भाग पूजनीय है। वहीं रुद्रप्रयाग के कालीमठ में मूर्ति का निचला हिस्सा पूजा जाता है।
धारी देवी के दर्शन किए बगैर चार धाम यात्रा अधूरी मानी जाती है।
हर साल नवरात्रि के मौके पर देवी कालीसौर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।