By रेनू तिवारी | Oct 16, 2026
अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ईंधन के निर्यात पर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 16 अक्टूबर से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए डीजल के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) में भारी कटौती की है, जबकि पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क को बढ़ा दिया गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, ये नए बदलाव 16 अक्टूबर से प्रभावी हो गए हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने 27 मार्च को डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर शुल्क लगाया था। इसके बाद हर पखवाड़े इसकी दरों में संशोधन किया जाता रहा है। वहीं 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी यह शुल्क लगाया गया था। मंत्रालय ने कहा कि घरेलू खपत के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच घरेलू स्तर पर ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया था।
इसका उद्देश्य निर्यातकों को अनुचित लाभ उठाने से रोकना भी था, क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई थीं। पश्चिम एशिया संकट के बीच निर्यात को हतोत्साहित करके पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना भी इस कर का मकसद था।
Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi