सिर्फ धर्म नहीं बल्कि स्वच्छता व प्रकाश का भी प्रतीक है दिवाली का त्योहार

By ब्रह्मानंद राजपूत | Oct 26, 2019

दिवाली या दीपावली हिंदुस्तान में मनाया जाने वाला एक प्राचीन पर्व है जो कि हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, इसके पीछे पौराणिक मान्यता है कि दीपावली के दिन हिंदुओं के आराध्य अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चैदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या वापस  लौटे थे। इससे पूरा अयोध्या अपने राजा के आगमन से हर्षित और उल्लसित था। अयोध्या के लोगों ने इसी खुशी में श्री राम के स्वागत में घी के दीप जलाए। कार्तिक मास की काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों के उजाले से जगमगा उठी। मान्यता है कि तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व दिवाली के रूप में हर्ष व उल्लास से मनाते हैं।  दीपावली का प्रकाश बुराई पर अच्छाई की जीत और भगवान राम के जीवन में मौजूद महान आदर्शों और नैतिकता में हमारे विश्वास का प्रतीक है।

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बेशक देश में स्वच्छता, साफ-सफाई का प्रतीक दीवाली पर्व मनाया जाता हो लेकिन आज भी स्वच्छता देश की सबसे बड़ी जरूरत है। हमारी सरकार की पुरजोर कोशिशों के बाद भी भारत में स्वच्छता अभियान सिर्फ सरकारी कार्यक्रम बनके रह गए हैं। हजारों संस्थाएं सिर्फ फोटोग्राफ्स के लिए अभियान चलाती हैं और वाहवाही लूटती हैं। लेकिन स्वच्छता के प्रति उनका योगदान फोटो कराने के अलावा तनिक भर भी नहीं हैं। मगर भारत में सरकार के साथ-साथ कई ऐसी संस्थाएं भी हैं जो वास्तविक स्वच्छता अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं। और देश में ऐसे करोड़ों लोग हैं जो स्वच्छता के लिए लोगों को जागरूक करते हैं। फिर भी लोग उनकी बातों को नजरअंदाज कर उनकी हंसी उड़ाते हैं और जगह-जगह देश को गंदा करते रहते हैं और प्रदूषण फैलाते रहते हैं। अगर ऐसे लोगों को जागरूक करना है जो कि स्वच्छता के प्रति बिल्कुल भी सजग नहीं है। इसके लिए हमें छोटे-छोटे बच्चों को बड़ों के नेतृत्व में आगे लाना होगा। अगर कोई गन्दगी फैलाएगा तो बच्चे उसे टोकेंगे तो वो बच्चों की बात को हँसी में नहीं उड़ा पाएंगे और न ही उनकी बात को टाल पाएंगे। बल्कि अपने किये पर शर्मिंदा भी होंगे। ऐसे ही देश में जितनी भी प्रमुख नदियां है जिनमें गंगा, यमुना और भी अन्य नदियां है। जिनमें लोग बहुत प्रदूषण करते हैं। उन जगहों खासकर नदियों के किनारे वाली जगह पर जितने भी स्कूल हैं उन बच्चों को स्कूल प्रशासन के नेतृत्व में आगे कर नदियों में प्रदूषण न करने के लिए लोगों को जागरूक कर सकते हैं। क्योंकि बच्चों की बात को कोई टाल नहीं सकता और बच्चा जो कहेगा उस पर हजार बार सोचेगा। 

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27 अक्टूबर को दिवाली के दिन देश में पटाखों के जरिए बहुत वायु प्रदूषण होगा। क्यों न इस दिशा में सरकार द्वारा लोगों को जागरूक किया जाना चाहिये। और वायु प्रदूषण द्वारा होने वाले खतरों से भी लोगों को आगाह किया जाना चाहिये। वायु प्रदूषण को रोकने के लिए आज ग्राम पंचायत से लेकर नगर पालिकाओं तक अभियान चलाने की जरुरत है। ऐसे अभियान की बागडोर भी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को दी जानी चाहिए। साथ ही साथ पटाखों द्वारा वायु प्रदूषण रोकने के लिए सरकार को एक इको-फ्रेंडली पटाखों की दिशा में काम करना चाहिए जिससे कि लोग पटाखे चलाने का भी मजा ले सकें और अपने वातावरण में भी प्रदूषण न हो। अगर हो भी तो न के बराबर हो। जिस जगह स्वच्छता, साफ-सफाई और प्रदूषण कम होगा वहीं लक्ष्मी जी का वास होगा। अगर लक्ष्मी जी का वास होगा तो सबके जीवन में वैभव, ऐश्वर्य, उन्नति, प्रगति, आदर्श, स्वास्थ्य, प्रसिद्धि और समृद्धि आयेगी।

- ब्रह्मानंद राजपूत

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