महाराज को शिवराज के साथ लाने के लिए जफर इस्लाम ने तुड़वा दी 16 साल पुरानी दोस्ती

By अनुराग गुप्ता | Mar 12, 2020

सियासी उलटफेर का नया पता- मध्य प्रदेश, जहां स्वागत चल रहा है, तैयारियां चल रही हैं...उम्मीदें जागी हैं...और सबसे ज्यादा खुशी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को है। मध्य प्रदेश की एक तस्वीर तो साफ हो गई और सिंधिया की भाजपा में एंट्री भी... यह तस्वीर थी उस शख्स की जिसने 16 साल पुरानी दोस्ती तुड़वा दी, जिसने 18 साल का विश्वास समाप्त कर दिया... आज हम बात करेंगे बैंकर से प्रवक्ता बने जफर इस्लाम की... जिन्होंने भाजपा को वो महाराज दिया जो 2019 से पहले कभी हारा नहीं था...

कौन हैं जफर इस्लाम ?

जफर इस्लाम फिलहाल भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं... बड़ी ही बेबाकी से पार्टी का पक्ष तमाम चैनलों पर रखते आए हैं। लेकिन उनका कद उस वक्त और भी ज्यादा बढ़ गया जब उन्होंने महाराज को भाजपा की सदस्यता दिला दी और शिवराज सिंह चौहान को एक उम्मीद की अबकी बार फिर से मामा की सरकार...

सिंधिया द्वारा सदस्यता लिए जाने के बाद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा का टिकट देकर रिटर्न गिफ्ट भी दे दिया। शिवराज ने सिंधिया का विश्वास भी हासिल कर लिया और अब अगला कदम क्या होगा ये तो किसी से छिपा ही नहीं है। मध्य प्रदेश की विधानसभा में बहुमत परीक्षण होगा और अगर 22 विधायकों के इस्तीफे मंजूर हो गए तो कमलनाथ की सरकार गिर जाएगी और मामा चौथी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाएंगे। लेकिन इस विषय पर चर्चा बाद में अभी जफर इस्लाम की बात करते हैं।

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यूं तो आप सब जानते ही हैं कि सिंधिया राजनीति में आने से पहले एक इन्वेस्टमेंट बैंकर थे। उस वक्त वह मुंबई में रहते थे और अक्सर ही अपने खास मित्र मिलिंद देवड़ा से मिलते रहते थे। तभी मिलिंद देवड़ा ने सिंधिया की मुलाकात जफर इस्लाम से कराई थी। फिर राजनीति में आने के बाद सिंधिया दिल्ली में ही रहते थे यहां पर उनकी मुलाकात अक्सर जफर इस्लाम से हुआ करती थी। अक्सर हुई मुलाकात के बाद सिंधिया और जफर दोस्त बन गए। हालांकि जफर उस वक्त किसी राजनीतिक पार्टी के सदस्य नहीं थे वह तो बस येस बैंक में बैंकर की भूमिका निभा रहे थे।

जफर इस्लाम ने भाजपा कब ज्वाइन किया ?

जफर इस्लाम का पूरा नाम डॉ सैयद जफर इस्लाम है। अभी भाजपा की सदस्यता लिए हुए उन्हें महज 7 साल ही हुए हैं लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह की गुड लिस्ट में अपनी जगह बना ली है। और जफर इस्लाम के भाजपा ज्वाइन करने के पीछे भी प्रधानमंत्री मोदी का हाथ था। कुछ वक्त पहले एक अंग्रेजी समाचार पत्र के लिए लिखे गए लेख में इस्लाम ने बताया था कि उन्होंने साल 2013 में राजनीति में कदम रखा था। जब वह येस बैंक में कार्यरत थे तो उनकी मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई और मोदी ने बड़ी गर्मजोशी के साथ जफर इस्लाम से हाथ मिलाया था। यह मुलाकात इतनी ज्यादा खास रही कि वह भाजपा के राष्ट्रनिर्माण के सपने को आगे बढ़ाने के लिए राजनीति में कूद गए।

एक दिलचस्प बात और आपको बता देते है कि जफर इस्लाम को जेपी नड्डा ने सदस्यता दिलाई थी। जो इस वक्त भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जफर इस्लाम ने कहां सोचा था कि जब वह सिंधिया को भाजपा की सदस्यता दिलाएंगे तो उस वक्त जेपी नड्डा भी मौजूद रहेंगे। 

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कहां से शुरू हुई थी सिंधिया को भाजपा में लाने की स्क्रिप्ट

सूत्र बताते हैं कि जफर इस्लाम ने इसकी शुरुआत करीब पांच महीने पहले ही कर दी थी और वह लगातार सिंधिया को भाजपा में शामिल करने के लिए मनाते भी रहे। कई बार तो उन्होंने साथ में खाना भी खाया। लेकिन जफर इस्लाम ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने होटल में कभी सिंधिया से मुलाकात की। हां खाना जरूर खाया यह स्वीकार भी किया।

हाल ही में 6 मार्च को जेपी नड्डा के बेटे की रिस्पेशन पार्टी थी। जहां पर वीआईपी एरिया में अमित शाह बैठे थे। वहां पर शाह के एक तरफ शिवराज सिंह चौहान, धर्मेंद्र प्रधान तो दूसरी तरफ नरेंद्र सिंह तोमर बैठे थे। जबकि सामने जफर इस्लाम। यह वही तमाम लोग हैं जिन्होंने मध्य प्रदेश की काया ही पलट दी और घोर धुरविरोधी सिंधिया को अपने पाले में लेकर आ गए।

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हालांकि मध्य प्रदेश में ऑपरेशन लोटस की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने संभाली थी और जफर इस्लाम हुकुम के एक्का थे। जिनका नाम तब तक सामने नहीं आया जब कि वह खुद सिंधिया को लेने के लिए उनके घर नहीं गए। और जब खुलासे हो ही रहे हैं तो यह भी सुन लीजिए कि होली के दिन जब प्रधानमंत्री ने सिंधिया से मुलाकात की थी तो कमरे में तीन नहीं चार लोग थे। पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दूसरे गृह मंत्री अमित शाह, तीसरे ज्योतिरादित्य सिंधिया और अंतिम शख्स जफर इस्लाम थे।

जफर इस्लाम ने तो मध्य प्रदेश की सियासत का युवा नेता भाजपा की झोली में डाल दिया तभी तो चौहान साहब ने ट्वीट किया कि स्वागत है महाराज, साथ है शिवराज। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि सिंधिया के बाद कौन सा कांग्रेसी नेता भाजपा में शामिल होता है क्योंकि कांग्रेस का युवा नेतृत्व आला नेतृत्व से खफा नजर आता है।

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