भारत का पहला विदेशी सैन्य बेस, जिसकी मदद से काबुल में फंसे भारतीयों को सकुशल निकाला गया

By अनुराग गुप्ता | Aug 27, 2021

काबुल। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद गुरुवार को पहला बड़ा धमाका हुआ। जिसमें 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आ रही हैं। इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई। दरअसल, 15 अगस्त के दिन राजधानी काबुल में तालिबानियों की एंट्री के साथ ही अफगानी जमीं में रह रहे लोग मुल्क छोड़ने के लिए विवश हो गए। क्योंकि यह लोग तालिबान द्वारा किए गए अत्याचारों को भूल नहीं पाए थे। ऐसे में भारी तादाद में लोग काबुल एयरपोर्ट पहुंचे, जहां से भारत समेत तमाम मुल्कों की सरकारों ने लोगों को निकालने के लिए आपातकालीन ऑपरेशन चलाया हुआ है। 

जॉर्ज फर्नांडिस का मिला समर्थन

विदेशी जमीं पर भारत के सैन्य बेस का विचार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में विदेश मंत्रालय को आया था। ऐसे में साल 2001-02 के आस पास तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने इसका समर्थन किया और इसे योजना की रूपरेखा दी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक गिसार की हवाईपट्टी की मरम्मत की गई और उसे बढ़ाकर बड़े विमानों को उतराने और उड़ान भरने लायक बनाया गया।

प्रमुख खबरें

राजस्थान BJP प्रमुख Madan Rathore बोले, Congress राज में भी 10 बार हुआ था SIR

Bombay High Court ने Arun Ferreira की गिरफ्तारी अवैध ठहराई, 2 लाख रुपये मुआवजे का आदेश

Jamia Millia Islamia में छात्रसंघ चुनाव की समयसीमा तय, छात्रों ने निकाला विजय जुलूस

Sun Pharma का India Business 17.3 फीसदी बढ़ा लेकिन शुद्ध मुनाफा 36.2 फीसदी घटा