By रेनू तिवारी | May 18, 2026
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने रविवार को उस समय एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया, जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थित बरकाह (Barakah) परमाणु संयंत्र पर ड्रोन से हमला किया गया। इस भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis) का सीधा असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिला, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई।
सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों में से टाटा स्टील, पावर ग्रिड, मारुति, ट्रेंट, टाइटन और एचडीएफसी बैंक के शेयर सबसे अधिक नुकसान में रहे। वहीं इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयर में तेजी देखी गई। एशियाई बाजारों में जापान का निक्की 225, चीन का एसएसई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग गिरावट में रहे जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी बढ़त में रहा।
अमेरिकी बाजार शुक्रवार को एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 111.2 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन शुद्ध लिवाल रहे थे और उन्होंने 1,329.17 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
FIIs की लिवाली भी नहीं रोक पाई गिरावट
दिलचस्प बात यह है कि शेयर बाजार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पिछले शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन शुद्ध खरीदार (Net Buyers) रहे थे और उन्होंने 1,329.17 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। इसके बावजूद, सप्ताहांत (Weekend) में हुए ड्रोन हमले और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के वैश्विक झटके के आगे घरेलू बाजार टिक नहीं सका। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) का यह दौर जारी रह सकता है।
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