Donald Trump ने Putin को फोन पर सुनाई खरी खरी! Iran मामले में दखल देने की बजाय Ukraine War खत्म करने पर ध्यान देने की दी सलाह

By नीरज कुमार दुबे | Apr 30, 2026

वैश्विक राजनीति के इस उबलते हुए दौर में एक दिलचस्प लेकिन खतरनाक विरोधाभास सामने आ गया है। एक ओर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन खुद को ईरान संकट का समाधानकर्ता बनाकर शांति की पहल कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर पुतिन को आईना दिखाते हुए कहा है कि अगर सच में कुछ करना है तो यूक्रेन युद्ध खत्म करो। यानी एक तरफ शांति की पेशकश, दूसरी तरफ प्राथमिकताओं की टक्कर।

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लेकिन इस पूरी कूटनीतिक तस्वीर में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ट्रम्प और पुतिन के बीच फोन पर बातचीत हुई। पुतिन ने न केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम में मध्यस्थ बनने की पेशकश की, बल्कि यह भी कहा कि रूस ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार को संभाल सकता है। करीब नौ सौ सत्तर पाउंड यूरेनियम को लेकर यह प्रस्ताव वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने की क्षमता रखता है। ट्रम्प ने इस पर ठंडा लेकिन तीखा जवाब दिया। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें ज्यादा खुशी होगी अगर पुतिन यूक्रेन युद्ध खत्म करने में अपनी ऊर्जा लगाएं। यह बयान महज सुझाव नहीं बल्कि एक सख्त संदेश है कि अमेरिका रूस को उसकी सीमाएं याद दिला रहा है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि पुतिन नहीं चाहते कि ईरान परमाणु हथियार बनाए, लेकिन उनकी प्राथमिकता यूक्रेन है।

हम आपको बता दें कि यूक्रेन को लेकर ट्रम्प का रुख बेहद आक्रामक रहा। ईरान के मुद्दे पर भी ट्रम्प ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ कहा कि ईरान को झुकना ही होगा। उन्होंने कहा कि ईरान बस यह कह दे कि वह हार मानता है। हम आपको बता दें कि अमेरिका ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी नाकेबंदी जारी रखी है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त दबाव बना हुआ है। ट्रम्प ने इसे बमबारी से ज्यादा प्रभावी हथियार बताया और कहा कि ईरान की हालत बेहद खराब हो चुकी है।

दूसरी ओर, ईरान ने भी अपनी रणनीति तेज कर दी है। उसने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का प्रस्ताव दिया, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि उसे अमेरिका और इजराइल से लिखित गारंटी चाहिए कि भविष्य में उस पर कोई हमला नहीं होगा। यह मांग ट्रम्प ने ठुकरा दी है, जिससे वार्ता की राह और कठिन हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की रणनीति दोहरी है। एक तरफ बातचीत का दिखावा, दूसरी तरफ लगातार दबाव और हमले। ईरान के जीवाश्म ईंधन निर्यात पर नाकेबंदी इसी रणनीति का हिस्सा है, जिससे तेहरान को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी के साथ भी रूस की भूमिका पर चर्चा हुई है, खासकर ईरान से अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम हटाने को लेकर। यह दिखाता है कि पर्दे के पीछे बड़े स्तर पर सौदेबाजी चल रही है। रूस ने भी साफ चेतावनी दी है कि अगर ईरान की जमीन पर कोई सैन्य कार्रवाई हुई तो यह बेहद खतरनाक होगा। यह बयान अमेरिका को सीधे तौर पर रोकने की कोशिश है। इस पूरी तस्वीर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुतिन सच में शांति के दूत बन सकते हैं, या यह भी शक्ति विस्तार की रणनीति है। और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रम्प की प्राथमिकताएं दुनिया को और बड़े टकराव की ओर धकेल रही हैं?

बहरहाल, दुनिया इस समय दो रास्तों के बीच खड़ी है। एक रास्ता बातचीत और संतुलन का है, दूसरा टकराव और युद्ध का। पुतिन पहला रास्ता दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ट्रम्प की सख्त प्राथमिकताएं उस रास्ते को और कठिन बना रही हैं। 

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