SIR को लेकर चुनाव आयोग का बड़ा दावा, ड्राफ्ट मतदाता सूची पर किसी दल ने नहीं दर्ज कराई कोई आपत्ति

By अंकित सिंह | Aug 07, 2025

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने गुरुवार को कहा कि बिहार में मतदाता सूची के मसौदे के संबंध में किसी भी राजनीतिक दल द्वारा एक भी दावा या आपत्ति प्रस्तुत नहीं की गई है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिहार की अंतिम मतदाता सूची में किसी भी पात्र मतदाता को न तो छोड़ा जाएगा और न ही किसी अपात्र मतदाता को शामिल किया जाएगा। आयोग ने 1 अगस्त को प्रकाशित बिहार की मतदाता सूची के मसौदे में किसी भी त्रुटि को सुधारने के लिए दावे और आपत्तियाँ प्रस्तुत करने की अपील की है।

एसआईआर के आदेशों के अनुसार, 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा सूची से किसी भी नाम को ईआरओ/एईआरओ द्वारा जांच करने और निष्पक्ष और उचित अवसर दिए जाने के बाद स्पष्ट आदेश पारित किए बिना नहीं हटाया जा सकता है। बिहार में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक ने आरोप लगाया है कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं। वे इस साल के मानसून सत्र की शुरुआत से ही बिहार एसआईआर पर चर्चा की मांग को लेकर संसद में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

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इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव आयोग से एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की नई अर्जी पर 9 अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा, जिसमें एसआईआर अभियान के बाद बिहार की मसौदा मतदाता सूची में शामिल नहीं किए गए 65 लाख मतदाताओं के आंकड़ों का खुलासा करने की मांग की गई है। एक गैर सरकारी संगठन की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बारे में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई है कि कौन मर चुका है और कौन स्थायी रूप से पलायन कर गया है।

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