Indian Government Vs Elon Musk: दबाव की राजनीति से इंपोर्ट ड्यूटी में राहत चाहने वाले टेस्ला के लिए कई राज्यों ने बिछाए पलक पावड़े

By अभिनय आकाश | Jan 19, 2022

टेस्ला की कार भारत में क्यों नहीं बिकती इसे लेकर आपने कई सारी दलीलें और कारण जरूर सुने होंगे। फिर भी हम भारतीय इस कार का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आए दिन लोग टेस्ला के सीईओ एलन मस्क से कार लॉन्चिंग को लेकर सवाल करते हैं। एलन मस्क भी अक्सर इस देरी के लिए भारत सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हैं। टेस्ला इस साल भारत में अपनी इम्पोर्टेड कारों की बिक्री करना चाहती है, लेकिन कंपनी का कहना है कि भारत में टैक्स दुनिया के बाकि देशों से ज्यादा है। एलन मस्क ने एक ट्वीटर यूजर को भारत में टेस्ला के आने को लेकर जवाब देते हुए कहा, "अभी भी सरकार के साथ कई चुनौतियों का सामना कर रहा हूं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि एलन मस्क और सरकार के बीच किस बात पर रजामंदी नहीं हो पा रही है। साथ ही आपको बताएंगे कि एलन मस्क अगर सरकार की बात मान लें तो टेस्ला की कार कम कीमतों पर लोगों को मिल सकेंगी। 

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एलन मस्क को हमारी ही देश की कुछ राज्य सरकारें केंद्र की मर्जी के खिलाफ अपने यहां खुला निमंत्रण दे रही है। टेस्ला कंपनी भारतीय बाजार में प्रवेश करने के लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित इंपोर्ट ड्यूटी देने के लिए तैयार नहीं है और वो उसमें रियासत चाहती है। बड़ी बात ये है कि टेस्ला इम्पोर्ट ड्यूटी भी नहीं देना चाहती और भारत में अपना प्लांट भी नहीं लगाना चाहती है। टेस्ला के सीईओ एलन मस्क सोशल मीडिया पर बयान देकर भारत सरकार पर दवाब बनाना चाहते हैं। एक ट्वीटर यूजर ने टेस्ला के सीईओ और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक एलन मस्क से पूछा कि क्या भारत में टेस्ला की गाड़ियों के लॉन्च पर कोई अपडेट है?  जवाब देते हुए मस्क ने कहा, "भारत में टेस्ला की इल्केट्रॉनिक गाड़ियां अब तक इसलिए लॉन्च नहीं हो सकी क्योंकि उनकी कंपनी को सरकार के साथ कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने लिखा कि अभी भी सरकार के साथ कई चुनौतियों का सामना कर रहा हूं।

क्या होती है इम्पोर्ट ड्यूटी

इंपोर्ट ड्यूटी वह कर है, जो किसी देश के सीमा शुल्क अधिकारी उस देश में किसी दूसरे देश से आने वाले सामान (आयातित सामान) पर वसूलते हैं। इंपोर्ट ड्यूटी कितनी लगेगी, यह सामान की कीमत के साथ-साथ सामान किस देश का है और कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है। इंपोर्ट ड्यूटी को कस्टम ड्यूटी, टैरिफ, इंपोर्ट टैक्स या इंपोर्ट टैरिफ भी कहते हैं। इंपोर्ट ड्यूटी के दो उद्देश्य होते हैं- स्थानीय सरकार के लिए आय जुटाना और स्थानीय स्तर पर उत्पादित होने वाले सामान को बाजार में फायदा दिलाना। भारत सरकार जानबूझकर इतनी ज्यादा इंपोर्ट लगाती है, ताकि वो भारत में गाड़ियों का उत्पादन करने वाली कंपनियों और जो विदेशी कंपनियां भारत में रह कर अपनी गाड़ियों का उत्पादन करती हैं, उनके हितों की रक्षा कर सके। भारत में ये 100 प्रतिशत है। वर्तमान में, भारत 40,000 डॉलर (30 लाख रुपये) से अधिक कीमत की आयातित कारों पर 100 फीसदी टैक्स लगाता है, जिसमें बीमा और शिपिंग खर्च शामिल हैं, और 40,000 डॉलर से कम की कारों पर 60 फीसदी इम्पोर्ट टैक्स लगता है।

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एलन मस्क दवाब की राजनीति से इंपोर्ट ड्यूटी में राहत चाहते हैं

मस्क सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं और टेस्ला चाहती है कि देश में उत्पादन करने के लिए प्रतिबद्ध किए बिना भारत में अपनी कारों पर आयात शुल्क कम करे।  सरकार दबाव की रणनीति के आगे नहीं झुकेगी। उन्होंने कहा कि भारत में इस समय ऑटोमोबाइल, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए एक पीएलआई योजना है। जिसके तहत टेस्ला को लोकल स्तर पर उत्पादन करने पर लाभ मिलेगा। टेस्ला कारों को जीरो फीसदी ड्यूटी के साथ सीकेडी फॉर्म में ला सकती है और उन्हें भारत में एसेम्बल कर सकती है। भारत सरकार का तर्क है कि उन्हें यहां आकर अपनी गाड़ियों का उत्पादन करना चाहिए, जैसे वो अभी चीन में कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में बात करते हुए कहा था कि दूसरे देशों में बनी टेस्ला की कारों को भारतीय बाजारों में बेटने में इंपोर्ट छूट कतई संभव नहीं है। जबकि एलन मस्क लगातार इंपोर्ट घटाने की मांग कर रहे हैं। टेस्ला को सलाह दी गई है कि भारत में आकर पहले कार बनाए फिर किसी भी छूट पर विचार होगा। गडकरी बताते हैं कि मस्क ने अमेरिका के बाद चीन में टेस्ला की फैक्ट्री डाली है और चाहते हैं कि वहीं कार पूरी तरह से एसेंबल करने के बाद भारतीय बाजारों में बेचा जाए। लेकिन ऐसी संभव नहीं है, अगर उन्हें भारत में कार बेचनी है तो यहीं फैक्ट्री डालें, या फिर जितनी इंपोर्ट ड्यूटी है वो दे दें। 

राज्यों ने बिछाए पलक पावड़े

हमारे ही देश में कुछ राज्य में जहां पर विपक्षी पार्टियों की सरकारें हैं वो मोदी का विरोध करने के नाम पर अपने राज्य में टेस्ला को तमाम रियासतों के साथ बुला रहे हैं। इन राज्यों में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक, पंजाब और तमिलनाडु के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। कर्नाटक के लार्ज स्केल एंड मीडियम स्केल इंडस्ट्रीज मिनिस्टर मुरुगेश आर निरानी ने ट्वीट किया कि बेंगलूरु देश में ईवी का हब बनकर उभरा है। यहां 400 से अधिक आरएंडडी सेंटर, 45 से अधिक ईवी स्टार्टअप्स और एक ईवी क्लस्टर शामिल है। टेस्ला का प्लांट लगाने के लिए कर्नाटक सबसे सही जगह है। तेलंगाना के उद्योग मंत्री के टी रामा राव, महाराष्ट्र के मंत्री जयंत पाटिल, पश्चिम बंगाल के मंत्री मोहम्मद गुलाम रब्बानी और पंजाब में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू टेस्ला को अपने यहां प्लांट लगाने के लिए आमंत्रित कर चुके हैं।

एक के बाद एक कई राज्यों से ऑफर

महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री, जयंत पाटिल ने मस्क को आश्वासन देते हुए कहा कि, ”महाराष्ट्र भारत के सबसे प्रगतिशील राज्यों में से एक है। हम आपको भारत में काम करने के लिये महाराष्ट्र की ओर से सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेंगे। हम आपको महाराष्ट्र में अपना विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए आमंत्रित करते हैं। पंजाब कांग्रेस चीफ नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि पंजाब मॉडल लुधियाना शहर को इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैट्री उद्योग का हब बनाएगा। जिसमें निवेश के लिए समयबद्ध सिंगल विंडो क्लियरेंस होगा जो पंजाब में नई तकनीक लाएगा, हरित रोजगार पैदा करेगा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का रास्ता प्रशस्त करेगा। बंगाल सरकार में अल्पसंख्यक विकास और मदरसा शिक्षा मंत्री मोहम्मद गुलाम रब्बानी ने एक ट्वीट करते हुए एलन मस्क को राज्य में टेस्ला की फैक्ट्री लगाने के लिए आमंत्रित किया। रब्बानी ने एलन के एक ट्वीट के जवाब में कहा कि वह पश्चिम बंगाल आ सकते हैं जहां बेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर है और उनकी लीडर ममता बनर्जी का विजन बहुत अच्छा है। आगे उन्होंने लिखा कि बंगाल का मतलब है बिजनस। इसके अलावा तेलंगाना के उद्दोग मंत्री ने ट्विटर पर लिखा, एलन, मैं भारत के तेलंगाना राज्य का उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री हूं। मुझे भारत/तेलंगाना में इकाई स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों से निपटने में टेस्ला की मदद करके खुशी होगी। हमारा राज्य भारत के शीर्ष व्यापार केंद्रों में से एक है। 

सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 30 प्रतिशत प्राइवेट व्हीकल और 70 प्रतिशत कमर्शिल व्हीकल, 40 प्रतिशत बसें और 80 प्रतिशत दोपहिया और तीन पहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक कर दिया जाएगा। बता दें कि भारत में अभी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के ज्यादा खरीदार नहीं हैं। पिछले साल भारत में कुल 24 लाख गाड़ियों की बिक्री हुई थी, जिनमें इलेक्ट्रिक गाड़ियां केवल पांच हजार थीं। लेकिन हाल ही में हुए एक सर्वे में देश के 35 प्रतिशत लोगों ने माना था कि वो अब इलेक्ट्रिक कार ही खरीदना चाहते हैं। इस लिहाज से भारत इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार बन सकता है। एलन मस्क की नजर इसी पर है।  

-अभिनय आकाश 

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