Epstein Files बनी ट्रंप के गले की फांस, अपने ही अधिकारियों से नाराजगी, लेकिन चाहकर भी नहीं उठा पा रहे कोई सख्त कदम

By अभिनय आकाश | Jul 28, 2025

दुनियाभर के देशों को सुझाव और स्वघोषित पीसमेकर बने डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों खुद उलझे हुए हैं। अमेरिका को फिर महान बनाने की कवायद में जुटे ट्रंप के सामने एक गड़ा मुर्दा फिर से जी उठा है। 22 साल पहले की एक घटना ट्रंप के सिर का दर्द बन चुकी है। आलम ये है कि अजीबोगरीब फैसले लेकर दुनिया को चौंकाने और उलझाने वाले ट्रंप अब खुद उलझन में हैं। एपस्टीन फाइल डोनाल्ड ट्रंप के गले ही फांस बन चुकी है। ट्रंप इस कदर बौखला चुके हैं कि इस केस की रिपोर्ट छापने वाले वॉल स्ट्रीट जनरल पर मानहानी का मुकदमा ठोक दिया और वो भी दस अरब डॉलर का।

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इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने द वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि राष्ट्रपति इस बात से नाराज़ हैं कि इस प्रकरण ने उनके एजेंडे को प्रभावित किया है। हालांकि, मामले से वाकिफ अन्य ने दावा किया कि टीम से नाराज़ होने के बावजूद, ट्रंप किसी को भी बर्खास्त नहीं करेंगे, क्योंकि बर्खास्तगी उस आग में घी डालने का काम करेगी जिसे ट्रंप शांत करना चाहते हैं। राष्ट्रपति की यह नाराज़गी हफ़्तों से चली आ रही ग़लतियों और शीर्ष अधिकारियों की स्पष्ट रणनीति की कमी के बाद आई है, जिन्होंने ख़ासकर राष्ट्रपति के समर्थकों की नाराज़गी को कम करके आंका था, और उम्मीद की थी कि देश अप्रकाशित एपस्टीन फ़ाइल्स को भूल जाएगा। 

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अधिकारियों ने कहा कि अपनी निराशा के बावजूद, ट्रंप अपने कर्मचारियों में बदलाव करने से हिचकिचा रहे हैं। राष्ट्रपति के एक करीबी ने अमेरिकी समाचार एजेंसी को बताया कि वह किसी को बर्खास्त करके कोई बड़ा तमाशा नहीं खड़ा करना चाहते। इस विवाद के केंद्र में अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी हैं। कई महीनों से एपस्टीन फाइलों को सार्वजनिक करना बॉन्डी के प्रमुख एजेंडे में से एक था। हालाँकि, 4 जुलाई की छुट्टियों के दौरान, बॉन्डी, उनके शीर्ष डिप्टी और एफबीआई अधिकारियों ने एपस्टीन फाइलों के बारे में एक अहस्ताक्षरित ज्ञापन को तुरंत अंतिम मंजूरी दे दी, जिससे एक नया बवाल मच गया। इस विवादास्पद ज्ञापन में तर्क दिया गया था कि ट्रंप प्रशासन को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि एपस्टीन की 2019 में जेल में आत्महत्या से मृत्यु हो गई थी और कहा गया था कि ऐसी कोई "ग्राहक सूची" नहीं है जिसके आधार पर वे किसी और पर मुकदमा चलाएँ। इसके अलावा, ज्ञापन में यह भी कहा गया था कि पीड़ितों की गोपनीयता की रक्षा के लिए इस मामले में कोई और दस्तावेज़ जारी नहीं किया जाएगा। 

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