By अभिनय आकाश | Sep 17, 2026
यूरोप चीन से परेशान है। परेशानी की वजह है ट्रेड डेफिसिट। चीन जिस तरीके से अपने बनाए हुए सामान दुनिया के तमाम देशों तक पहुंचाता है, उसने अब यूरोप को पूरी तरह से चिंता में डाल दिया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वंडेरलेन ने सार्वजनिक तौर पर इस बात को स्वीकारते हुए कहा है कि यूरोपीय संघ चीन के साथ अपने अस्थिर व्यापारिक घाटे को कम करने के लिए हर संभव तरीका अपनाएगा। वॉन डेरलिन का कहना है कि यह संतुलन जिसमें बीते साल हर दिन 1 अरब यूरो यानी कि 1.15 अरब का सामान व्यापार घाटा हुआ था। एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है और यूरोप पहले से ही डीइंडस्ट्रियलाइजेशन के कारण दूसरे चीनी झटके का सामना कर रहा है। जून में ईयू नेताओं ने यूरोपीय आयोग से कहा था कि वह चीन के साथ बातचीत से नतीजा लाएं और यह पक्का करें कि ब्लॉक के पास अपने हितों की रक्षा करने के लिए जरूरी सभी साधनों बातचीत की अगुवाई कर रहे यूरोपीय व्यापार आयुक्त ने कहा था कि वह अक्टूबर तक ठोस नतीजे हासिल करना चाहते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि चीन की कमजोर घरेलू मांग ने उसे यूरोपीय बाजार पर निर्भर बना दिया है, जिससे दोनों पक्षों के लिए मिलकर काम करने और समाधान निकालने का एक साझा हित पैदा होता है। इसके अलावा, उन्होंने चीनी महत्वपूर्ण कच्चे माल (क्रिटिकल रॉ मैटेरियल्स) पर ईयू की "खतरनाक निर्भरता" को कम करने का संकल्प भी जताया। उन्होंने संघ की खरीद प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए 'यूरोपियन कॉर्पोरेशन ऑन क्रिटिकल रॉ मैटेरियल्स' की स्थापना के महत्व पर बल दिया। अपने संबोधन में वॉन डेर लेयेन ने कनाडा के साथ साझेदारी बढ़ाने का भी वादा किया, ताकि उसे यूरोपीय संघ का पहला 'एसोसिएट सदस्य' बनाया जा सके। चीन पर उनकी यह टिप्पणी ईयू के व्यापार प्रमुख मारोस सेफकोविक के उस हालिया बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने अक्टूबर तक ठोस नतीजों की मांग की थी, जब बीजिंग में व्यापार वार्ता का दूसरा दौर आयोजित होना है।
वन डेरलिन ने यूरोपीय संसद में अपनेस्टेट ऑफ द यूनियन भाषण में कहा कि समाधान खोजने के लिए मिलकर काम करना दोनों पक्षों के हित में है। जिस तरीके से उस्ला वंडेयर ने अपनी चिंताएं सबके सामने रखी और यह बताया कि किस तरीके से रोजाना अब हर दिन 1 बिलियन यूरो का यूरोप को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उसने वाकई में बताया है कि चीन किस तरीके से सिर्फ भारत के अंदर ही ट्रेड डेफिसिट का मामला नहीं खड़ा करता है बल्कि दुनिया के तमाम देशों में किस तरीके से वह अपनी पैठ बना रहा है। इसका सीधा और साफ उदाहरण यूरोप से मिलता है।