By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 03, 2020
लंदन। इंग्लैंड के पूर्व अंडर-19 कप्तानअजीम रफीक ने दावा किया कि जब वह काउंटी टीम यार्कशर में थे तो नस्लवाद के कारण वह आत्महत्या करने के बारे में भी सोचने लगे थे। रफीक ने क्लब पर संस्थागत रूप से नस्लवादी होने का आरोप लगाया। कराची में जन्में इस ऑफ स्पिनर ने क्लब में कप्तानी की जिम्मेदारी भी संभाली। उन्होंने कहा कि उन्हें बाहरी व्यक्ति (आउटसाइडर) जैसा लगता था और 2016 से 2018 के बीच खेलने के दौरान जब उन्होंने नस्ली व्यवहार की शिकायत की तो उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया जिसके बाद उनका मानवता से भरोसा ही उठ गया। रफीक ने ‘ईएसपीएनक्रिकइंफो’ से कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि मैं यार्कशर में अपने खेलने के दिनों के दौरान आत्महत्या करने के कितने करीब था। मैं अपने परिवार के ‘पेशेवर क्रिकेटर’ के सपने को साकार कर रहा था लेकिन अंदर से मैं मर रहा था। मैं काम पर जाते हुए डरता था। मैं हर दिन दर्द में रहता था। ’’ उन्होंने साथ ही क्लब में ‘संस्थागत नस्लवाद’ का दावा किया जिसने अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं दिया है।
ईमानदारी से कहूं तो मैं काफी गुमराह महसूस कर रहा हूं। ’’ रफीक ने कुछ वाकयों का भी जिक्र किया जिसमें क्लब नस्लवादी बर्ताव के खिलाफ कोई कदम उठाने में नाकाम रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि यार्कशर ने उनके मृत पैदा हुए बेटे की मौत का हवाला देते हुए उन्हें क्लब से रिलीज कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने (मृत पैदा हुए) बेटे को अस्पताल से सीधा अंतिम संस्कार के लिये ले गया। यार्कशर ने मुझे कहा कि वे पेशेवर और व्यक्तिगत तौर पर मेरी देखभाल करेंगे। लेकिन मुझे सिर्फ एक छोटा सा ईमेल मिला। मुझे कहा गया कि मुझे रिलीज कर दिया गया है। मुझे लगता है कि इसे सचमुच मेरे खिलाफ लिया गया। यह जिस तरह से किया गया, वह भयावह है।