'बस अपनी बेटी को सुरक्षित वापस चाहते हैं', MBA स्टूडेंट के 12 दिनों से लापता होने के बाद टूट रहा परिवार का सब्र

By रेनू तिवारी | Jun 10, 2026

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित खूबसूरत लेकिन ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों के बीच इस वक्त रेस्क्यू टीमें एक बड़े और बेहद चुनौतीपूर्ण तलाशी अभियान में जुटी हुई हैं। वहीं, दूसरी तरफ रामनगर का एक मध्यमवर्गीय परिवार कभी न खत्म होने वाले एक भयानक इंतज़ार से गुज़र रहा है। उनके लिए, यह घटना अब खबरों में आने वाली किसी 'लापता ट्रेकर' की कहानी मात्र नहीं है, बल्कि एक लाडली बेटी, प्यारी पोती और बहन की जिंदगी का सवाल है, जिसके अचानक गायब होने से पूरा परिवार अंदर से टूट चुका है। 24 साल की होनहार MBA स्टूडेंट बबीता पांडे बीते 30 मई को उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल (Dayara Bugyal) में ट्रेकिंग के दौरान लापता हो गई थीं। आज उन्हें गायब हुए पूरे 12 दिन बीत चुके हैं। देश की तमाम दिग्गज रेस्क्यू एजेंसियों की दिन-रात की मशक्कत के बावजूद, अब तक बबीता का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। रामनगर में उनके घर पर सन्नाटा पसरा है और हर बातचीत सिर्फ इसी एक प्रार्थना के साथ खत्म होती है: "बबीता सुरक्षित घर लौट आए।"

बबीता के पिता, गोपाल पांडे का कहना है कि परिवार इस अनिश्चितता से जूझ रहा है। जब भी वह अपनी बेटी के बारे में बात करते हैं तो उनकी आवाज़ भर आती है; उनकी बेटी का भविष्य सपनों और महत्वाकांक्षाओं से भरा था। परिवार के सदस्यों के अनुसार, बबीता MBA की पढ़ाई के साथ-साथ पार्ट-टाइम नौकरी भी कर रही थी। वह एक मेहनती और दृढ़ निश्चयी युवती के तौर पर जानी जाती थी, जो अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही थी।

अब, उन सपनों की जगह चिंता और अनसुलझे सवालों ने ले ली है। "हम बस यही चाहते हैं कि हमारी बेटी सुरक्षित वापस आ जाए," उनके पिता ने बार-बार अधिकारियों से गुहार लगाई है।

परिवार पहले से ही मुश्किलों से जूझ रहा है

इस त्रासदी ने परिवार को बुरी तरह प्रभावित किया है क्योंकि वे हाल के वर्षों में पहले ही कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। लगभग पाँच साल पहले, गोपाल पांडे एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए थे। चल-फिर न पाने के कारण, वह अब अपना दिन अपनी बेटी के बारे में खबर का इंतज़ार करते हुए बिताते हैं।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ट्रेकिंग की यात्रा एक बुरे सपने में बदल जाएगी, जिसने पूरे परिवार को संकट में डाल दिया है।

अपनी पोती को याद कर दादी का बुरा हाल

बबीता की दादी, लक्ष्मी पांडे में भी उतना ही दर्द दिखता है; वह रेस्क्यू टीमों और अधिकारियों से तलाशी जारी रखने की अपील कर रही हैं। भावनाओं में बहकर, उन्होंने अधिकारियों से अपनी पोती को सुरक्षित घर लाने के लिए हर संभव प्रयास करने का आग्रह किया है।

उनकी अपीलें उस परिवार की भावनाओं को दर्शाती हैं जो उम्मीद का दामन थामे हुए है, भले ही हर गुज़रता दिन और मुश्किल होता जा रहा है। तलाशी अभियान तेज़ हुआ

बबीता दो दोस्तों के साथ दायरा बुग्याल गई थीं और 30 मई को लापता होने से पहले गोई बेस कैंप में रुकी थीं। अभी भारतीय सेना, ITBP, NDRF, SDRF, पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन टीमों की मदद से बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस तलाशी अभियान में 150 से ज़्यादा कर्मचारी, ड्रोन और खोजी कुत्तों को लगाया गया है।

जैसे-जैसे तलाशी जारी है, जांच करने वालों ने ट्रेकिंग के इंतज़ामों पर भी ध्यान देना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि परमिट से जुड़ी गड़बड़ियां मिलने के बाद संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी की जांच की जा रही है।

एजेंसी का रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि बबीता के साथ ट्रेकिंग पर गए दो साथियों और ट्रेक से जुड़े दूसरे लोगों से भी जारी जांच के तहत पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों के लिए, मुश्किल इलाकों में यह ऑपरेशन एक चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान बना हुआ है। वहीं, बबीता के परिवार के लिए हर पल डर और उम्मीद के बीच एक भावनात्मक संघर्ष जैसा है।

जब बचाव टीमें जंगलों, घाटियों और पहाड़ी रास्तों को खंगाल रही हैं, तब उनके करीबी उस एक खबर का इंतज़ार कर रहे हैं जिसके लिए वे 30 मई से प्रार्थना कर रहे हैं - कि बबीता पांडे मिल गई हैं और घर लौट रही हैं।

Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi  

प्रमुख खबरें

अनिल अंबानी को बड़ी राहत, Black Money Act केस में Bombay High Court ने लगाई दंडात्मक कार्रवाई पर रोक

Japan में Jacob Elordi का एक फैन पर भड़कना वायरल! मुझे मत छुओ, ब्रो कहकर रेस्टोरेंट से निकले बाहर

Project 18 Destroyer आखिर है क्या? जिसने चीन-पाकिस्तान दोनों की उड़ा दी नींद

Afghanistan में Pakistan की एयरफोर्स ने किया हमला, भड़का तालिबान!