FCRA संशोधन बिल नियंत्रण के लिए, पारदर्शिता के लिए नहीं: Shashi Tharoor का आरोप

By अंकित सिंह | Aug 06, 2026

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रस्तावित 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे पारदर्शिता के बजाय नियंत्रण वाला कदम बताया है और आरोप लगाया है कि यह विधेयक विदेशी योगदान पाने वाले संगठनों की संपत्ति पर सरकार (कार्यपालिका) को बहुत ज़्यादा अधिकार देता है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' में छपे एक लेख में थरूर ने तर्क दिया कि प्रस्तावित संशोधनों से नियंत्रण का एक ऐसा अभूतपूर्व तरीका लागू होगा जो पारंपरिक कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर देता है।

थरूर के अनुसार, प्रस्तावित ढांचे के तहत संपत्ति को अस्थायी रूप से 'नामित प्राधिकरण' (Designated Authority) को सौंपा जा सकेगा। इससे सरकार ऐसी संपत्तियों का प्रबंधन कर सकेगी और अंततः उन्हें बेच सकेगी, साथ ही बिक्री से प्राप्त राशि को 'भारत की संचित निधि' (Consolidated Fund of India) में जमा कर सकेगी—भले ही उस संपत्ति के लिए विदेशी योगदान से केवल आंशिक रूप से ही धन जुटाया गया हो।

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उन्होंने डीम्ड सेसेशन के प्रस्तावित कॉन्सेप्ट पर भी आपत्ति जताई। इस नियम के तहत, अगर तय समय के अंदर FCRA रजिस्ट्रेशन को रिन्यू नहीं किया जाता या उसके लिए अप्लाई नहीं किया जाता, तो रजिस्ट्रेशन अपने आप खत्म हो जाएगा, जिससे विदेशी फंड और उससे जुड़ी संपत्तियों तक पहुंच तुरंत रुक जाएगी। अपने गृह राज्य केरल की संस्थाओं का ज़िक्र करते हुए थरूर ने कहा कि ईसाइयों द्वारा चलाए जा रहे चैरिटेबल ट्रस्ट, अस्पताल, स्कूल, मेडिकल कॉलेज और कल्याणकारी संगठन, घरेलू संसाधनों और विदेशी अनुदानों के मेल से पीढ़ियों से हाशिए पर मौजूद समुदायों की सेवा करते आ रहे हैं।

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