AB-PMJAY: जानिए कैसे बनेगा आपका आयुष्मान कार्ड? वर्षपर्यंत कितने रुपये का मिलेगा मुफ्त इलाज?

By कमलेश पांडे | Jun 27, 2026

भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (National Health Authority) द्वारा संचालित "आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना" (AB-PMJAY) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी जनस्वास्थ्य योजना है, जिसके तहत पात्र परिवारों को प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलता है। चूंकि यह सुविधा सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में उपलब्ध है, इसलिए इसकी लोकप्रियता गांवों से लेकर शहरों-महानगरों तक में है। 

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सवाल है कि आप अपना आयुष्मान कार्ड कैसे बनाएं? तो जान लीजिए कि सबसे पहले आपको अपनी पात्रता की जांच करनी है। इस हेतु आप सम्बन्धित अधिकारिक पोर्टल या आयुष्मान ऐप पर जाकर मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। ततपश्चात आधार या अन्य विवरण डालकर अपना नाम खोजें। उसके बाद यदि आपकी पात्रता सत्यापित हो गई तो अपना ई-केवाईसी (e-KYC) करें। इस हेतु आधार आधारित सत्यापन (OTP या बायोमेट्रिक) का चरण पूरा करें। फिर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। इसके बाद अपना कार्ड डाउनलोड करें। इससे पहले आपका दस्तावेज सत्यापित किया जाएगा। फिर सत्यापन के बाद डिजिटल आयुष्मान कार्ड डाउनलोड किया जा सकता है। इसके अलावा, नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से भी कार्ड बनवाया जा सकता है। 

सवाल है कि आखिर किन-किन लोगों को इसका लाभ मिलता है? तो जवाब होगा कि एसईसीसी (SECC)-2011 के आधार पर चिन्हित गरीब एवं वंचित परिवार। जबकि शहरी क्षेत्रों के कुछ श्रमिक वर्ग भी इसमें शामिल किए गए हैं। वहीं 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिक, आय की परवाह किए बिना ही, अब इस योजना के पात्र हैं। इससे इस योजना की लोकप्रियता भी बढ़ी है।

सवाल है कि इस योजना के तहत क्या-क्या खर्च कवर होते हैं? तो जवाब होगा कि योजना में सामान्यतः शामिल हैं: अस्पताल में भर्ती, सर्जरी, दवाइयाँ, जांच (डायग्नोस्टिक टेस्ट), आईसीयू (ICU) सेवाएँ, इम्प्लांट, भोजन व आवास, भर्ती से पहले और बाद का कुछ चिकित्सा खर्च, ताकि मरीज और उसके आश्रितों को परेशान न होना पड़े।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके मार्फ़त इलाज केवल पैनल (Empanelled) में शामिल अस्पतालों में ही मुफ्त मिलता है। ऐसे में यदि कोई अस्पताल योजना के तहत कवर इलाज के लिए अतिरिक्त पैसा मांगता है, तो उसकी शिकायत की जा सकती है। शिकायत सही मिली तो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है, इसलिए प्रमाण सहित शिकायत करें।

यूँ तो यह योजना पूरे देश में लागू है, लेकिन विपक्षी नेताओं ने इसकी सफलता में बहुत रोड़े अटकाए। यही वजह है कि दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु आदि राज्यों में इस योजना को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। हालांकि दिल्ली और पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने से हालात सुधर चुके हैं।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

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