Bhimsen Joshi Birth Anniversary: 19 की उम्र में पहली Performance, भीमसेन जोशी ने 7 दशकों तक किया संगीत पर राज

By अनन्या मिश्रा | Feb 04, 2026

भारत समेत तमाम देशों में अपने संगीत को अमर बनाने वाले पंडित भीमसेन जोशी का 04 फरवरी को जन्म हुआ था। वह हिंदी फिल्म जगत का एक जाना-माना नाम हैं। पंडित भीमसेन जोशी किराना घराने के शास्त्रीय गायक थे और उन्होंने महज 19 साल की उम्र में अपनी पहली प्रस्तुति दी थी। पंडित भीमसेन जोशी पूरे सात दशकों तक शास्त्रीय गायन करते रहे और उन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि पूरे हिंदुस्तान को अपने गायन कला से गौरान्वित किया। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर पंडित भीमसेन जोशी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

पहली प्रस्तुति

बता दें कि पंडित भीमसेन जोशी ने 19 साल की उम्र में अपनी पहली प्रस्तुति दी थी। वहीं 20 साल की उम्र में उनका पहला एल्बम आया था। इस एल्बम में कन्नड़ और हिंदी के कुछ धार्मिक गीत थे। भीमसेन जोशी ने शुरूआती दौर में रेडियो कलाकार के रूप में मुंबई में काम किया था।

इसे भी पढ़ें: Khushwant Singh Birth Anniversary: विवादों से बेपरवाह, अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने वाले बेबाक Writer थे खुशवंत सिंह

गुरु की खोज

बचपन से ही पंडित भीमसेन जोशी को संगीत का बेहद शौक था। ऐसे में वह गुरु की तलाश के लिए घर से निकल पड़े और अब्दुल करीम खान के पास जा पहुंचे। जिसके बाद वह अगले दो सालों तक वह बीजापुर, ग्वालियर और पुणे में रहे। उन्होंने ग्वालियर के उस्ताद हाफिज अली खान से भी संगीत की शिक्षा ली। पंडित रामभाऊ कुंदगोलकर से शास्त्रीय संगीत की शुरूआती शिक्षा लेने के बाद भीमसेन जोशी अपने घर से पहले कलकत्ता और पंजाब गए।


हर देशवासी को एक सूत्र में पिरोया

पंडित भीमसेन जोशी ने 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' को अपनी आवाज देकर हर देशवाली को एक सूत्र में पिरोया। उन्होंने गायकी में अपने शास्त्रीय संगीत से जो इतिहास रचा, वह आज भी अमिट है। इसके साथ ही उन्होंने कई फिल्मों के लिए भी गाने गाए। इनमें तानसेन, बसंत बहार, सुर संगम और अनकही शामिल हैं।

एक सुर में पिरोया

'मिले सुर मेरा तुम्हारा' को अपनी आवाज देकर हर देशवासी को एक सूत्र में पिरोने का सुरीला संदेश देने वाले भीमसेन जोशी की गायकी ने अपने शास्त्रीय संगीत जो इतिहास रचा वह आज भी चमकदार और रोशन है।

माफ कराई ट्रेन की टिकट

जब पंडित भीमसेन अपने गुरु की तलाश में घर से निकले थे, तो उनके पास पैसे नहीं थे। ऐसे में वह बिना टिकट लिए ही ट्रेन में बैठ गए और बीजापुर तक सफर किया। ट्रेन में टी.टी को राग भैरव में 'कौन-कौन गुन गावे' और 'जागो मोहन प्यारे' सुनाकर अपना टिकट माफ करवाया था। इसके बाद ट्रेन में बैठे लोगों ने उनके सफर के दौरान खानेपीने का इंतजाम किया।

सम्मान

संगीत में पंडित भीमसेन जोशी के योगदान के लिए उनको 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था। वहीं इसके अलावा उनको 'पद्म विभूषण' और 'पद्म भूषण' सहित कई अन्य प्रतिष्ठित पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया था।


मृत्यु

वहीं लंबी बीमारी के बाद 24 जनवरी 2011 को पंडित भीमसेन जोशी का निधन हो गया था।

प्रमुख खबरें

IRFC में सरकार के Offer For Sale से मचा हड़कंप, Infosys की AI डील ने निवेशकों को बनाया मालामाल।

White House में India के Tariff पर मचा था बवाल, Donald Trump ने अधिकारियों को सरेआम किया खारिज

America से तनाव के बीच Kim Jong Un का बड़ा दांव, North Korea अब समुद्र में बढ़ाएगा परमाणु ताकत

France में Heatwave का जानलेवा कहर, 40 लोगों की मौत, Eiffel Tower भी समय से पहले बंद