Khushwant Singh Birth Anniversary: विवादों से बेपरवाह, अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने वाले बेबाक Writer थे खुशवंत सिंह

Khushwant Singh
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भारत के एक उपन्यासकार, राजनीतिज्ञ, पत्रकार और वकील रहे खुशवंत सिंह का 02 फरवरी को जन्म हुआ था। खुशवंत सिंह को असंख्य पाठकों का प्यार मिला। हालांकि उनका जीवन विवादों और आलोचनाओं से भी अछूता नहीं रहा।

लेखक, इतिहासकार, संपादक रहे खुशवंत सिंह का 02 फरवरी को जन्म हुआ था। खुशवंत सिंह को असंख्य पाठकों का प्यार मिला। हालांकि उनका जीवन विवादों और आलोचनाओं से भी अछूता नहीं रहा। लेकिन उन्होंने इसकी कभी फिक्र नहीं की। खुशवंत सिंह ने शराब-शबाब सहित अपने अन्य किसी शौक पर पर्दे की जरूरत नहीं महसूस की। वह अपनी बेबाक लेखनी, हास्य और व्यंग्य के लिए मशहूर थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर खुशवंत सिंह के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और शिक्षा

पंजाब के हदाली में 02 फरवरी 1915 को खुशवंत सिंह का जन्म हुआ था। यह स्थान अब पाकिस्तान में है। उन्होंने शुरूआती शिक्षा पूरी करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से सेंट स्टीफिंस कॉलेज से पढ़ाई की। बाद में उन्होंने साल 1951 में ऑल इंडिया रेडियो में नौकरी करना शुरूकर दिया।

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करियर

खुशवंत सिंह ने अपनी पेशेवर जिंदगी में पत्रकार के रूप में बहुत प्रसिद्धि पाई। साल 1951 में वह आकाशवाणी से जुड़े। फिर साल 1951 से लेकर 1953 तक वह भारत सरकार के पत्र 'योजना' का संपादन करते रहे। इसके अलावा वह साल 1980 तक मुंबई से प्रकाशित होने वाली प्रसिद्ध अंग्रेजी साप्ताहिक 'न्यू डेल्ही' और 'इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया' के संपादक रहे।

खुशवंत सिंह के उपन्यास

डेल्ही

ट्रेन टु पाकिस्तान

दि कंपनी ऑफ़ वूमन

खुशवंत सिंह का कहानी-संग्रह

दस प्रतिनिधि कहानियाँ

विष्णु का प्रतीक

कर्म, रेप

जाति व्यवस्था के खिलाफ

साल 1983 तक खुशवंत सिंह ने दिल्ली के प्रमुख अंग्रेजी दैनिक 'हिंदुस्तान टाइम्स' का संपादन किया। हर सप्ताह आने वाले उनके कॉलम का पाठक बेसब्री से इंतजार किया करते थे। एक लेखक और एक व्यक्ति के तौर पर वह जाति व्यवस्था के खिलाफ थे। उनकी रचनाएं समकालीन व्यंग्य से लेकर राजनीतिक टिप्पणी, सिख धार्मिक ग्रंथों और उर्दू कविता के उत्कृष्ट अनुवाद तक हैं।

तीनों चीजों से था बेहद प्यार

खुशवंत सिंह ने अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव तक लिखना नहीं छोड़ा। 99 साल की उम्र में भी वह सुबह 4 बजे उठकर लिखना पसंद करते थे। वह लिखने के लिए अक्सर घंटों तक बगीचे में बैठे रहते थे। बताया जाता है कि खुशवंत सिंह को तीन चीजों से बहुत ज्यादा प्यार था। पहला दिल्ली, दूसरा लेखन और तीसरा खूबसूरत महिलाएं।

मृत्यु

वहीं 20 मार्च 2014 को खुशवंत सिंह ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था।

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