By रेनू तिवारी | Nov 02, 2026
देश के विमानन (Aviation) सेक्टर को लेकर केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने नए नियमों को अधिसूचित कर दिया है, जिसके तहत अब आपातकालीन या 'असाधारण परिस्थितियों' (Extraordinary Circumstances) और जनहित में केंद्र सरकार को एयरलाइन टिकटों की कीमतों में दखल देने की कानूनी अनुमति मिल गई है।
'भारतीय वायुयान नियम' का नियम 192
नियम 192 के तहत, अनुसूचित हवाई सेवाएं (scheduled air services) संचालित करने वाली एयरलाइनों को परिचालन लागत (cost of operations) जैसे कारकों के आधार पर अपना किराया तय करना होगा और किराए का विवरण नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को सौंपना होगा।
नियमों में कहा गया है कि यदि सरकार को लगता है कि कोई असाधारण स्थिति पैदा हो गई है और जनहित में दखल देना जरूरी है, तो वह लिखित निर्देश जारी कर सकती है।
नए नियमों के अनुसार, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और यात्रियों को सूचित रखने के लिए एयरलाइनों को अपनी वेबसाइटों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किराए की जानकारी देनी होगी। DGCA अनुसूचित एयरलाइनों द्वारा तय किए गए किराए की निगरानी करेगा।
एयरलाइनों को किराए का विस्तृत ब्योरा (pricing breakdown) देना होगा
एयरलाइनों को बेस फेयर (मूल किराया), टैक्स, शुल्क, कैंसिलेशन चार्ज, रिफंड की शर्तें और अन्य लागू शुल्कों का अलग-अलग ब्योरा भी देना होगा। भारत ने 1994 में हवाई किराए तय करने की प्रक्रिया को नियंत्रण मुक्त (deregulate) कर दिया था, जिससे एयरलाइनों को बाजार की स्थितियों के आधार पर टिकट की कीमतें तय करने की छूट मिल गई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कहना है कि एयरलाइंस आमतौर पर मांग, परिचालन लागत और बुकिंग के समय के आधार पर किराया तय करती हैं, जिसमें यात्रियों के लिए अलग-अलग प्राइसिंग बैंड (मूल्य श्रेणियां) उपलब्ध होते हैं।
इससे पहले के 'एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937' (Aircraft Rules, 1937) के नियम 135(4) के तहत, DGCA को यह अधिकार था कि यदि उसे विमानन क्षेत्र में अत्यधिक या अनुचित कीमतें (predatory pricing) या कुछ कंपनियों द्वारा बाजार पर अनुचित एकाधिकार (oligopolistic practices) जैसी स्थिति दिखे, तो वह निर्देश जारी कर सके। हालाँकि हाल ही में अधिसूचित नियम 192 में एयरलाइन शुल्कों की निगरानी का प्रावधान बरकरार रखा गया है, लेकिन इसमें विशेष रूप से अत्यधिक या अनुचित मूल्य निर्धारण (predatory pricing) और कुछ कंपनियों के वर्चस्व वाली प्रथाओं (oligopolistic practices) को सरकार के हस्तक्षेप का आधार नहीं बताया गया है।
हालाँकि, यह नया ढांचा केंद्र सरकार को कुछ विशेष परिस्थितियों में एयरलाइन किराए के संबंध में निर्देश जारी करने की शक्ति देता है, जो नियमों में बताई गई शर्तों के अधीन होगा।