नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र की सुरक्षा घटाई गई, हिंसा में हुए नुकसान का मुआवजा भी वसूलेगी सरकार

By एकता | Mar 30, 2025

काठमांडू नगर निगम ने शनिवार को पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह को पत्र भेजकर एक दिन पहले राजधानी के कुछ हिस्सों में राजशाही समर्थक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। वहीं, नेपाल सरकार ने शाह के लिए तैनात सुरक्षाकर्मियों की संख्या कम कर दी है। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी दी। नेपाल की राजधानी के कुछ हिस्सों में राजशाही समर्थक प्रदर्शनों के हिंसक हो जाने के एक दिन बाद यह कदम उठाया गया है।

नेपाल की राजधानी के कुछ हिस्सों में राजशाही समर्थक प्रदर्शनों के हिंसक हो जाने के एक दिन बाद उठाया गया है। पूर्व नरेश के निजी आवास निर्मल निवास पर सुरक्षाकर्मियों की संख्या शुक्रवार के विरोध प्रदर्शनों के बाद 25 से घटाकर 16 कर दी गई। गृह मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सरकार ने पूर्व नरेश की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों की टीम में भी फेरबदल किया है। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने पूर्व नरेश की गतिविधियों पर भी सतर्कता बढ़ा दी है।

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पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र पर जुर्माना लगाया

काठमांडू के कुछ हिस्सों में शुक्रवार को तनावपूर्ण स्थिति देखी गई, जब राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया। प्रदर्शनकारियों ने एक राजनीतिक पार्टी के कार्यालय पर हमला किया, वाहनों में आग लगा दी और काठमांडू के तिनकुने-बानेश्वर क्षेत्र में दुकानें लूट लीं। सुरक्षाकर्मियों और राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में एक टीवी कैमरामैन समेत दो लोग की मौत हो गई और 110 अन्य घायल हो गए। चूंकि यह विरोध प्रदर्शन ज्ञानेंद्र शाह के आह्वान पर आयोजित किया गया था, इसलिए काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी (केएमसी) के महापौर बालेंद्र शाह ने काठमांडू के बाहरी इलाके महाराजगंज में निर्मला निवास में स्थित उनके आवास पर एक पत्र भेजा, जिसमें उन्हें नुकसान के हर्जाने के रूप में 7,93,000 नेपाली रुपये का भुगतान करने को कहा गया।

पूर्व नरेश को भेजे गए पत्र की प्रतियां मीडिया में जारी की गईं हैं, जिसमें केएमसी ने कहा कि पूर्व नरेश के आह्वान पर आयोजित विरोध प्रदर्शन से महानगर की विभिन्न संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है और राजधानी का पर्यावरण प्रभावित हुआ है। शुक्रवार के आंदोलन के संयोजक दुर्गा प्रसाद ने एक दिन पहले ज्ञानेंद्र शाह से मुलाकात की थी और उन्हें राजशाही व हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन करने के निर्देश मिले थे। राजशाही समर्थक काठमांडू और देश के अन्य भागों में रैलियां आयोजित कर रहे हैं तथा 2008 में समाप्त की गई 240 वर्ष पुरानी राजशाही को पुनः स्थापित करने की मांग कर रहे थे।

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