By Neha Mehta | Aug 15, 2026
महाराष्ट्र में ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए घर तक पहुंचने वाले खाने और खाद्य सामान की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। राज्य के Food and Drug Administration (FDA) ने 13 अगस्त को बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया, जिसमें क्विक-कॉमर्स कंपनियों के स्टोर्स, होटल, रेस्टोरेंट और दूसरे फूड बिजनेस प्रतिष्ठानों में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जांच के दौरान कहीं एक्सपायर्ड सामान मिला तो कहीं खाने-पीने की चीजों को सही तापमान पर रखने में लापरवाही सामने आई। कुछ जगहों पर कॉकरोच और दूसरे कीटों का प्रकोप मिला, जबकि कई प्रतिष्ठानों में सफाई, कचरा निपटान और फूड हैंडलर्स की हाइजीन को लेकर भी सवाल खड़े हुए।
FDA की टीमों ने सिर्फ यह नहीं देखा कि सामान बिक रहा है या नहीं, बल्कि स्टोरेज की पूरी व्यवस्था को जांच के दायरे में रखा गया। अधिकारियों ने तापमान नियंत्रण, सफाई, पेस्ट कंट्रोल, फूड हैंडलर्स की व्यक्तिगत स्वच्छता, FIFO और FEFO नियमों, फूड सेफ्टी रिकॉर्ड और FSSAI लाइसेंस के डिस्प्ले तक की जांच की। पुणे के लोहेगांव स्थित एक Zepto फैसिलिटी में अधिकारियों को ऐसे खाद्य उत्पाद मिले जिनकी ‘Use By’ डेट निकल चुकी थी। इसके अलावा सामान को पहले आए सामान को पहले इस्तेमाल करने यानी FIFO और एक्सपायरी डेट को ध्यान में रखते हुए FEFO प्रक्रिया का भी सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा था। स्टोरेज की सफाई और पेस्ट कंट्रोल में भी कमियां मिलीं। फूड हैंडलर्स की व्यक्तिगत स्वच्छता को लेकर भी FDA ने गंभीर आपत्ति जताई। सुनवाई के दौरान प्रतिष्ठान की ओर से दिया गया जवाब भी अधिकारियों को संतोषजनक नहीं लगा।
पुणे के Warje Jakat Naka स्थित Swinsta ENT Pvt Ltd की जांच में भी हालात चिंताजनक मिले। यहां कॉकरोच का प्रकोप, फ्रोजन फूड के लिए कोल्ड-चेन बनाए रखने में कमी और तापमान नियंत्रण से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आईं। इसके अलावा सफाई और पेस्ट कंट्रोल की व्यवस्था भी निर्धारित मानकों के मुताबिक नहीं पाई गई। यानी जिस जगह पर खाने की चीजों को सुरक्षित रखने की उम्मीद की जाती है, वहीं बेसिक हाइजीन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए।
मुंबई के मालाड वेस्ट स्थित Blinkit फैसिलिटी की जांच में चिलर रूम का तापमान 6 डिग्री सेल्सियस पाया गया, जो निर्धारित मानक से ज्यादा था। इतना ही नहीं, करीब 40 फूड हैंडलर्स का मेडिकल परीक्षण नहीं कराया गया था और उससे जुड़े जरूरी रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे। कुछ कर्मचारी हेड कवर, एप्रन और ग्लव्स के बिना काम करते पाए गए। स्टोरेज एरिया की व्यवस्था भी ठीक नहीं थी। सामान बिखरा हुआ था, कुछ रैक टूटे और जंग लगे हुए थे। शाकाहारी, मांसाहारी, पका हुआ भोजन और डेयरी उत्पादों को अलग रखने की व्यवस्था में भी कमियां मिलीं। अधिकारियों ने ट्रेनिंग और फूड सेफ्टी सुपरविजन को लेकर भी सवाल उठाए। घाटकोपर की एक अन्य Blinkit फैसिलिटी में ड्रेनेज और कचरा निपटान की व्यवस्था कमजोर मिली। फ्रोजन फूड के तापमान को लेकर भी समस्या थी। इसके अलावा बिना पैक किए गए खाद्य पदार्थों के स्टोरेज एरिया में लाइटिंग फिक्स्चर भी सुरक्षित तरीके से कवर नहीं किए गए थे। इस यूनिट को 74 में से सिर्फ 34 अंक यानी करीब 46 फीसदी मिले और इसे नॉन-कंप्लायंट घोषित किया गया।
मुलुंड स्थित Zepto फैसिलिटी में भी कई कमियां सामने आईं। यहां कचरा निपटाने की व्यवस्था, तापमान नियंत्रण, लाइटिंग, सफाई और अलग-अलग तरह के सामान के लिए स्टोरेज को लेकर खामियां मिलीं। FSSAI लाइसेंस भी प्रमुखता से प्रदर्शित नहीं किया गया था। इस यूनिट को 180 में से 81 अंक यानी 45 फीसदी मिले और इसे भी नॉन-कंप्लायंट घोषित किया गया। वहीं Goregaon की Zepto Gola Unit की दोबारा जांच में तापमान नियंत्रण, लाइटिंग, खाद्य पदार्थों के स्टोरेज, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता और साफ-सफाई से जुड़ी समस्याएं फिर सामने आईं। इस यूनिट को 142 में से 98 अंक यानी करीब 70 फीसदी मिले, लेकिन कमियां पूरी तरह दूर नहीं होने के कारण इसे नॉन-कंप्लायंट ही माना गया।
Andheri की Instamart फैसिलिटी में अधिकारियों को कुछ फूड पैकेट सीधे फर्श पर रखे हुए मिले। स्टोरेज स्पेस की कमी, भीड़भाड़, तापमान नियंत्रण में गड़बड़ी और सफाई-लाइटिंग से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। इस यूनिट को 140 में से 76 अंक यानी करीब 55 फीसदी मिले। Lokhandwala स्थित Zepto यूनिट में भी पेरिशेबल फूड के लिए पर्याप्त तापमान नियंत्रण नहीं था। फ्रोजन प्रोडक्ट्स के लिए जरूरी एंट्री एरिया यानी ante-room की कमी मिली। वेयरहाउस का लेआउट और फूड, नॉन-फूड तथा खतरनाक पदार्थों को अलग रखने की व्यवस्था भी मानकों के मुताबिक नहीं थी। इस यूनिट को 140 में से 65 अंक यानी 47 फीसदी मिले।
जांच सिर्फ स्टोर और वेयरहाउस तक सीमित नहीं रही। Satara जिले के Karad में एक Blinkit स्टोर से जुड़े 125 दोपहिया डिलीवरी राइडर्स की भी जांच की गई। FDA के मुताबिक, कई राइडर्स के पास पहचान पत्र और मेडिकल फिटनेस रिकॉर्ड नहीं थे। इसके अलावा डिलीवरी के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों, बैग और बॉक्स पर संबंधित फूड बिजनेस का FSSAI लाइसेंस प्रदर्शित नहीं किया गया था। कमियां दूर होने तक दोपहिया वाहनों के जरिए होने वाली डिलीवरी से जुड़ी कारोबारी गतिविधि रोकने का निर्देश दिया गया।
राज्यभर में चलाए गए अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री भी जब्त की गई। FDA ने करीब 698 किलो दूध और दूध से बने उत्पाद जब्त किए, जिनकी अनुमानित कीमत 34,302 रुपये बताई गई। इसके अलावा दूध से जुड़े उत्पादों, बेकरी आइटम और खाद्य तेल समेत करीब 1,270 किलो खाद्य सामग्री जब्त की गई, जिसकी कीमत लगभग 1.29 लाख रुपये थी। अन्य खाद्य पदार्थों और प्रतिबंधित उत्पादों को मिलाकर जब्त किए गए सामान की कुल कीमत करीब 46.89 लाख रुपये बताई गई।
अभियान के दौरान प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री, सप्लाई और ट्रांसपोर्टेशन के मामले में 10 FIR दर्ज की गईं। पान मसाला और गुटखा जैसे प्रतिबंधित उत्पादों के मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। FDA के अनुसार, इन मामलों में करीब 46.76 लाख रुपये का प्रतिबंधित स्टॉक जब्त किया गया। क्विक-कॉमर्स कंपनियों के अलावा FDA ने राज्य में 109 होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान 49 सुधार नोटिस जारी किए गए और चार फूड बिजनेस लाइसेंस निलंबित किए गए। इस विशेष अभियान के तहत कुल 15 छापेमारी भी की गई।
Goregaon स्थित Dadasaheb Phalke Chitranagari यानी Film City में Bollywood Cafe, Studio Number 13 भी FDA की जांच से बच नहीं सका। यहां अधिकारियों को साफ-सफाई और फूड सेफ्टी के स्तर पर कई गंभीर कमियां मिलीं। बर्तन और परिसर की स्थिति संतोषजनक नहीं थी और बड़े स्तर पर मक्खियों का प्रकोप पाया गया। किचन में गंदा पानी, जमा हुई गंदगी और खाने के अवशेष मिले। इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थों को जंग लगी और अस्वच्छ सतहों पर तैयार किया जा रहा था। FDA ने कैफे प्रबंधन को कमियां तुरंत दूर करने और निर्धारित फूड सेफ्टी एवं हाइजीन नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। विभाग ने Food Safety and Standards Act, 2006 की धारा 69 के तहत दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की बात भी कही है। FDA का साफ संदेश—ऑनलाइन फूड बिजनेस में लापरवाही नहीं चलेगी
महाराष्ट्र FDA ने साफ किया है कि यह कार्रवाई Food Safety and Standards Act, 2006 और उसके तहत बनाए गए नियमों के आधार पर की गई है। विभाग ने खासतौर पर उन फूड बिजनेस ऑपरेटरों को चेतावनी दी है जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खाने-पीने का सामान बेचते या डिलीवर करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ ऑर्डर जल्दी पहुंचाना काफी नहीं है—खाने की क्वालिटी, स्टोरेज, तापमान, साफ-सफाई और उसे संभालने का तरीका भी उतना ही जरूरी है। दरअसल, क्विक-कॉमर्स का मॉडल भले ही ‘मिनटों में डिलीवरी’ का हो, लेकिन FDA की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि फूड सेफ्टी के मामले में जल्दबाजी की कोई जगह नहीं है।