By अनन्या मिश्रा | Jul 21, 2026
क्या आप भी अक्सर जरूरत से ज्यादा चिंता करते हैं। अगर आपका जवाब हां है तो आपको जानकर हैरानी होगी कि इसका कनेक्शन आपके जीन्स से जुड़ा हो सकता है। हाल ही में हुए एक बेहद अहम शोध में वैज्ञानिकों ने इंसानी जीनोम में 74 ऐसी जगहों की जानकारी लगाई है। जिसका सीधा संबंध हमारी चिंता के लक्षणों से है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस रिसर्च से जुड़ी सभी जरूरी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।
यहां समझना जरूरी है कि आखिर 'जीनोम' क्या है। आसान भाषा में समझें कि जीनोम किसी भी जीव के पूरा डीएनए या आनुवंशिक सामग्री का पूरा सेट है। यह एक बुकलेट की तरह है। जिसमें किसी जीव के निर्माण, शरीर के काम करने के तरीके, उसके विकास और प्रजनन से जुड़े सारे जैविक निर्देश मौजूद होते हैं।
बता दें कि यह कोई छोटा शोध नहीं है। शोधकर्ताओं ने मिलकर करीब 6,93,869 लोगों के जेनेटिक डेटा की गहराई से जांच की। इस विशाल डेटाबेस के विश्लेषण से यह बात सामने आई कि जिन लोगों में चिंता गंभीर लक्षण होते हैं। उनके अंदर कुछ खास तरह के जेनेटिक फर्क काफी ज्यादा होते हैं। वैज्ञानिकों की यह अहम स्टडी मशहूर जर्नल 'नेचर ह्यूमन बिहेवियर' में प्रकाशित हुई है
इस शोध ने वैज्ञानिकों को चिंता के पीछे छिपे बायोलॉजिकल क्रम को लेकर एक नई समझ दी है। इस खोज पर रोशनी डालते हुए बताया कि यह अध्ययन समझने की दिशा में एक बड़ा और अहम कदम है। यह हमारी बायोलॉजिकल प्रोसेस चिंता के जोखिम पर किस तरह असर डाल सकती है।
लेकिन एक बेहद जरूरी बात यह है कि किसी भी इंसान में चिंता का खतरा सिर्फ उसके जेनेटिक्स से तय नहीं होता है। यह जेनेटिक्स व्यक्ति की जिंदगी के निजी अनुभवों, मनोवैज्ञानिक कारकों और उसके हालात के बीच का आपसी तालमेल होता है। यानी की आपका डीएनए एक भूमिका जरूर निभाता है। लेकिन आपके जीवन की परिस्थितियां भी इसमें बराबर की हिस्सेदार होती है।