By अनन्या मिश्रा | Apr 07, 2026
अक्सर यह देखने को मिलता है कि छोटे बच्चे दीवार की पपड़ी या मिट्टी या चॉक खाते है। बहुत से लोग इस आदत को सामान्य समझते हैं और बच्चे को डांटते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी होने का यह संकेत होता है। कई बार वयस्कों और खासकर महिलाओं में यह समस्या देखने को मिलती है। मिट्टी, कच्चा कोयला, चॉक या कागज जैसी अजीबो-गरीब चीजें खाने की बहुत इच्छा होती है।
एक्सपर्ट के मुताबिक यह मिथ है कि सिर्फ बच्चों को मिट्टी या चॉक खाने की आदत होती है।
यह समस्या किसी भी उम्र के साथ हो सकती है, फिर चाहे वह बच्चे हो, जवान हो या बुजुर्ग हो।
लेकिन बड़े लोग अक्सर शर्म की वजह से इस बात को छिपाते हैं। लेकिन यह एक शारीरिक समस्या है, जिसको पोषण से सही किया जा सकता है।
चॉक या मिट्टी खाने का मन करने का मूल कारण शरीर में आयरन और कभी-कभी जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की भारी कमी होना है।
जब खून में आयरन का लेवल कम होता है। जो व्यक्ति की पलेट यानी की स्वाद ग्रंथियां बदलने लगती है। ऐसे में चॉक का टेक्सचर और मिट्टी की खुशबू पसंद आने लगता है।
यह मस्तिष्क की एक प्रतिक्रिया है, जो शरीर में चल रही अंदरूनी कमी को दिखाता है।
महिलाओं में गर्भावस्था, मासिक धर्म और स्तनपान के दौरान शरीर में आयरन की कमी हो जाती है।
भारत में महिलाओं के सबसे ज्यादा एनीमिया की समस्या पाई जाती है। जिस वजह से महिलाओं में 'पाइका' के लक्षण ज्यादा नजर आते हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल बदलाव और पोषक तत्वों की बढ़ती जरूरत भी चॉक या मिट्टी खाने की क्रेविंग को तेज कर देती है।
ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे पहले अपना आयरन लेवल चेक कराएं और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्स लें।
वहीं इस कमी को नेचुरल रूप से पूरी करने के लिए अपनी डाइट में गुड़, अनार, किशमिश और खजूर जैसे फलों को शामिल करें।
वहीं हरी पत्तेदार सब्जियां और पालक आयरन के बेहतरीन स्त्रोत है। जोकि इस समस्या को जड़ से खत्म करने में सहायता करते हैं।