By अभिनय आकाश | Apr 07, 2026
फ्रांस ने एक तीर से दो शिकार करते हुए एक तरफ अमेरिका की तिजोरी खाली कर दी और दूसरी तरफ अपने खजाने में बेतहाशा वृद्धि कर ली है। बैंक ऑफ फ्रांस ने अमेरिका में रखा अपना बाकी सोना बेच दिया है और उसकी जगह अब यूरोप में अपना नया गोल्ड भंडार बना लिया है। जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच पूरी हुई इस प्रक्रिया के साथ ही, फ्रांस की अपनी विदेशी मुद्रा भंडार का एक हिस्सा न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक में रखने की पुरानी परंपरा अब हमेशा के लिए खत्म हो गई है। सोने की रिकॉर्ड-ऊंचाई पर पहुंचने के दौरान (जो लगभग 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी) 26 चरणबद्ध लेन-देन करके, फ़्रांसीसी केंद्रीय बैंक ने अनुमानित €12.8 बिलियन (या लगभग $14.7 बिलियन) का पूंजीगत लाभ अर्जित किया। इससे इसकी वित्तीय स्थिति में ज़बरदस्त बदलाव आया और 2024 में हुए €7.7 बिलियन (लगभग $8.8 बिलियन) के घाटे को 2025 में €8.1 बिलियन (लगभग $9.3 बिलियन) के शुद्ध लाभ में बदल दिया। फ़्रांसीसी अधिकारियों ने इस कदम को तकनीकी उन्नयन बताया है। गवर्नर फ्रांकोइस विलेरॉय डी गैलहाउ ने इसे पुराने, "गैर-मानक" सोने के बिस्कुटों को वर्तमान अंतरराष्ट्रीय विशिष्टताओं को पूरा करने वाले बुलियन से बदलने के व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में वर्णित किया।
फ्रांस ने अमेरिका की वित्तीय जटिलताओं को भांपते हुए न्यूयॉर्क के वॉल्ट से भौतिक रूप से सोना वापस लाने की लंबी और कठिन प्रक्रिया के बजाय एक बेहद चतुर रणनीतिक रास्ता चुना। जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच फ्रांस के सेंट्रल बैंक ने वहां रखे अपने 129 टन 'नॉन-स्टैंडर्ड' गोल्ड बार को वहीं बेच दिया और उस रकम से तत्काल यूरोपीय बाजार में उतना ही सोना खरीद लिया। इस चालाकी भरी अदला-बदली से फ्रांस ने न केवल ट्रांसपोर्टेशन के झंझट और अमेरिकी बाधाओं को दरकिनार किया, बल्कि कीमतों के अंतर (मार्जिन) से 12.8 अरब यूरो का भारी-भरकम मुनाफा भी कमा लिया, जिससे उसकी यह चाल एक सफल आर्थिक मास्टरस्ट्रोक साबित हुई। फ्रांस ने बिना किसी शोर-शराबे या लॉजिस्टिक मुसीबत के, अमेरिका की नाक के नीचे से अपना सोना भी निकाल लिया और अपनी तिजोरी को अरबों यूरो से भर भी लिया। यह कदम दिखाता है कि आधुनिक दौर में युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि 'आर्थिक बुद्धिमत्ता' से भी जीते जाते हैं।