By योगेश कुमार गोयल | Feb 14, 2022
प्यार को सदैव दिल से जोड़कर देखा जाता रहा है, दिमाग से नहीं। प्यार के संबंध में अक्सर यह भी कहा जाता है कि प्यार अंधा होता है और यह ऊंच-नीच, अमीरी-गरीबी, जात-पात इत्यादि सामाजिक बंधनों की परवाह नहीं करता। हालांकि मनोवैज्ञानिकों का यही मानना है कि अचानक किसी से प्यार हो जाना या उसे दिलोजान से चाहने लगना, यह सब कुछ अपने आप नहीं होता और न ही इसमें हमारे दिल की कोई बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है बल्कि हमारे मस्तिष्क में होने वाली कुछ रासायनिक क्रियाएं तथा जीन संबंधी संरचनाएं एवं विशेषताएं ही प्यार हो जाने का प्रमुख आधार होती हैं और इन्हीं की बदौलत प्यार और उसकी गहराई तय होती है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जवानी के साथ-साथ बुढ़ापे की अवस्था में भी यदि किसी के दिल की धड़कनें किसी विपरीत लिंगी को देखकर बढ़ने लगती हैं और वह उससे प्यार का दावा करने लगता है तो यह सब उसके शरीर के भीतर की जैव वैज्ञानिक क्रियाओं का ही परिणाम होता है, जिसका एक वैज्ञानिक आधार होता है। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि वास्तव में प्यार का एक मनोविज्ञान होता है, जिसे समझ पाना हर किसी के लिए संभव नहीं होता।
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार मस्तिष्क में स्थित एक विशेष अंग ‘हाईपोथेलेमस’ में जब ‘डोपेमाइन’ तथा ‘नोरपाइनफेरिन’ नामक दो न्यूरोट्रांसमीटरों की अधिक मात्रा हो जाती है तो यह शरीर में उत्तेजना व उमंग पैदा करने लगती है। ये न्यूरोट्रांसमीटर मस्तिष्क में उस समय सक्रिय होते हैं, जब दो विपरीत लिंगी मिलते हैं। कभी-कभी समलिंगियों के मामले में भी ऐसा ही देखा जाता है। जब भी इन्हें एक-दूसरे की कोई बात आकर्षित करती है तो उनके मस्तिष्क का यह हिस्सा अचानक सक्रिय हो उठता है। जब मस्तिष्क के इस हिस्से की सक्रियता के कारण ‘डोपेमाइन’ नामक इस रसायन का स्तर बढ़ता है तो यह मस्तिष्क में आनंद, गर्व, ऊर्जा तथा प्रेरणा के भाव उत्पन्न करता है। डोपेमाइन के कारण ही एक अन्य रसायन ‘ऑक्सीटोक्सिन’ का स्राव भी बढ़ता है, जो दूसरे साथी को बाहों में भरने और दुलारने की प्रेरणा देता है जबकि ‘नोरपाइनफेरिन’ के कारण ‘एड्रिनेलिन’ रसायन का स्राव बढ़ता है, जो दिल की धड़कनें तेज करने के लिए उत्तरदायी होता है। ‘वेसोप्रेसिन’ रसायन आपसी लगाव बढ़ाने तथा अटूट बंधन के लिए होता है। न्यूयार्क की एक जानी-मानी समाजशास्त्री तथा मानव संबंधों की विशेषज्ञा डा. हेलन फिशर इस सिलसिले में बहुत लंबा शोध कार्य कर चुकी हैं। उनका भी यही मानना है कि मस्तिष्क में पाए जाने वाले रसायनों ‘डोपेमाइन’ तथा ‘नोरपाइनफेरिन’ से ही प्यार की भावना का सीधा संबंध है। इन्हीं कारणों से प्रेमियों में असाधारण ऊर्जा का विस्फोट होता है और प्यार करने वालों की नींद और भूख गायब होने की भी यही प्रमुख वजह है।
योगेश कुमार गोयल
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं तथा 32 वर्षों से साहित्य एवं पत्रकारिता में सक्रिय हैं।)