By दिनेश शुक्ल | Nov 29, 2020
उज्जैन। कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी अर्थात वैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट के प्रसिद्ध गोपाल जी मंदिर में परम्परा के अनुसार शनिवार देर रात हरि-हर हुआ। "हर" (भगवान महाकाल) चांदी की पालकी में सवार होकर गोपाल जी मंदिर पहुंचे, जहां "हरि" (भगवान विष्णु) को तुलसी की माला भेंटकर सृष्टि का भार सौंपा। कोरोना के चलते लगाए गए प्रतिबंध के कारण इस अद्भुत हरि-हर मिलन के साक्षी बनने से इस बार आम श्रद्धालु वंचित रह गए।
शनिवार की रात 11 बजे राजाधिराज बाबा महाकाल (हर) चांदी की पालकी में सवार होकर महाकालेश्वर मंदिर से ठाठबाट के साथ गोपाल मंदिर की ओर रवाना हुए। हर की सवारी मंदिर से निकलते ही महाकाल के जयघोष से गगन गुंजायमान हो गया। कड़े सुरक्षा पहरे में भगवान की पालकी रात 12 बजे गोपाल मंदिर पहुंची। सुरक्षा घेरे में पालकी उठाकर चल रहे कहारों के अलावा केवल पुजारी, पुरोहित शामिल थे। सवारी मार्ग पर आम श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजन की अनुमति नहीं थी और हिंगोट चलाने और आतिशबाजी पर भी प्रतिबंध था। इसके बावजूद कुछ श्रद्धालु इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए पहुंच गए और फुलझड़ियां जलाकर हरि-हर मिलन का आनंद उठाया।
इसके बाद गोपाल मंदिर में हरि-हर मिलन हुआ। यहां भगवान महाकाल व गोपालजी को सम्मुख बैठाकर पूजा-अर्चना की गई। हरि हर मिलन के दौरान गोपाल मंदिर के पुजारियों ने बाबा महाकाल की पूजा-अर्चना पर गोपालजी की ओर से उन्हें तुलसी की माला पहनाई। वहीं महाकाल मंदिर के पुजारियों ने गोपालजी का पूजन कर बिल्व पत्र की माला पहनाई गई। इस तरह सृष्टि का भार हर द्वारा हरि को सौंपने का कार्य संपन्न हुआ। हरि-हर मिलन के बाद महाकाल की सवारी पुनः निर्धारित मार्ग से वापस महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।