3 कदम उठाने भर से मच जाएगी तबाही, कैसे तीन बीघा कॉरिडोर, फरक्का समझौते में फंसा बांग्लादेश?

By अभिनय आकाश | Jan 02, 2026

कारोबार, मददगार, साझेदार, ये तीन शब्द भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों को परिभाषित करते थे। हालांकि, 2024 के मध्य और खासतौर पर 2025 की शुरुआत से बने हालात अब तनावपूर्ण संबंधों का नया अध्याय लिखते नजर आ रहे हैं। बांग्लादेश जो भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है वो यह ना भूलले कि मोहम्मद यूनुस की गर्दन पूरी तरह से भारत के पंजे में है। अगर भारत की तरफ आंख उठाने की बांग्लादेश ने कोशिश भी की तो बिना मारे बांग्लादेश में तबाही आ जाएगी। क्योंकि भारत ने अगर तीन बीघा कॉरिडोर या तीन बीघा जो गलियारा है उसको लेकर कदम उठा लिया तो यूनुस छटपटा जाएंगे। आखिर ये तीन बीघा कॉरिडोर क्या है जिसको लेकर बांग्लादेश की नब्ज़ कहा जा रहा है कि पूरी तरह से भारत के हाथों में है।

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मोदी सरकार संधि पर लेगी बड़ा फैसला?

बैराज में दो जगह पानी जाती है। एक तो गंगा में पानी जाती है जो कि बांग्लादेश में चली जाती है। दूसरा हुबली में पानी आती है। समझौते के तहत अगर 75000 क्यूसेक से ज्यादा पानी है तो 45000 क्यूसेक भारत रखेगा और बाकी बांग्लादेश को दे देगा। अगर 75000 क्यूसेक से कम है 70 से 75000 के बीच में है तो 35000 क्यूसेक भारत रखेगा और बाकी बांग्लादेश को दे देगा। और अगर 70 या 73000 क्यूसेक से भी कम है तो भारत 3000 क्यूसेक रखेगा और बाकी पड़ोसी को देगा। कुल मिलाकर कहे तो भारत को कम से कम 30 से 35000 क्यूसेक जल की आवश्यकता है वो रख के बाकी बांग्लादेश को दे देगा इसलिए ये बैराज बनाया था। अब ये समझौते की मियाद 2026 में खत्म हो रही है। इस बार, भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक स्थिर और दीर्घकालिक सरकार है, जबकि बांग्लादेश लगभग 17 महीनों की अस्थिरता के बाद लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार की स्थापना की ओर अग्रसर है। यह देखना बाकी है कि क्या संधि का आपसी सहमति से, या कुछ सुधारों के साथ नवीनीकरण किया जाता है, या यदि ढाका भारत को अस्थिर करने की इच्छा रखने वाले कुछ अंतरराष्ट्रीय तत्वों के इशारों पर चलता रहता है तो नई दिल्ली कड़ा रुख अपनाती है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए, नई दिल्ली देश और उसके लोगों की सुरक्षा और अखंडता की रक्षा के लिए कार्रवाई करने में संकोच नहीं कर सकती है। संयोगवश, पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार समर्थन देने के कारण, जिसमें हाल ही में अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुआ घातक आतंकी हमला भी शामिल है, भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। यह निर्णय भारत की संप्रभुता की रक्षा और पाकिस्तान की कार्रवाइयों के खिलाफ जवाबी उपायों के व्यापक पैकेज का हिस्सा था, जिसमें आतंकी लॉन्चपैडों पर सीमा पार सटीक हमले भी शामिल थे।

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बांग्लादेश की 30% खेती इसी पानी पर निर्भर

बांग्लादेश की 30% खेती इसी पानी पर निर्भर है। अगर ऐसा हुआ तो बांग्लादेश के एक बड़े हिस्से में सुखाड़ की स्थिति पैदा हो जाएगी और वहां खेतीबाड़ी सारी चौपट हो जाएगी। शेख हसीना के तख्तापलट के बाद भारत से उसके रिश्ते बिगड़े हुए हैं। ऐसे में उसे डर है कि अगर भारत ने इस समझौते को रिन्यू नहीं किया तो उसकी एक तिहाई आबादी प्यासी मर जाएगी और खेती बिल्कुल चौपट हो जाएगी। यही वजह है कि वह अब अपनी गरीबी का रोना रोते हुए भारत के आगे नाक रगड़ रहा।

3 बीघा गलियारा क्या है जो दे सकता है सबसे बड़ी चोट

बांग्लादेश के दहाग्राम और अंगारपोर्टा एन्क्लेव के संबंध में 1974 के एलबीए के अनुच्छेद 1(14) में तीन बीघा के पास 178 मीटर x 85 मीटर के इलाके को स्थायी रूप से पट्टे पर देकर इन एन्क्लेव तक पहुंच का प्रावधान है। इसे 7 अक्टूबर, 1982 को भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री और बांग्लादेश के तत्कालीन विदेश मंत्री के बीच और 26 मार्च, 1992 को भारत के विदेश सचिव और बांग्लादेश के अतिरिक्त विदेश सचिव के जरिए लागू किया गया था। यह पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में स्थित है। बांग्लादेशी नागरिक बिना वीजा/पासपोर्ट के भारतीय जमीन से होकर गुजरते हैं। 2015 में जब मोदी सरकार आई तो इन्होंने आपस में एक्सचेंज कर लिया। बोला कि ऐसा ठीक नहीं लगता कि बांग्लादेश के बीचों-बीच भारत के कुछ सीमा है तो एक्सचेंज कर दिया। लेकिन एक जगह ऐसी है जिसको कहते हैं दाहा ग्राम अंगार कोटा इनक्लेव हम इसकी आबादी बहुत बड़ी मतलब बहुत बड़ा ये इनक्लेव है क्षेत्रफल काफी ज्यादा है और आबादी 21000 परिवार वहां पर है। भारत चाहे तो अपनी ज़मीन वापस ले सकता है, इसमें कोई अंतरराष्ट्रीय बाध्यता नहीं है। ये पूर्ण रूप से भारत की उदारता पर निर्भर है। 

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