40 विशेषज्ञों को कैसे मिलने जा रही है सरकारी नौकरी?

By अभिनय आकाश | Jul 04, 2019

मोदी सरकार अलग तरह के फैसले लेने के लिए जानी जाती है। सरकार के एक नए प्लान के तहत निजी क्षेत्र के 40 विशेषज्ञों को ब्यूरोक्रेसी में शामिल किया जाएगा। केंद्र सरकार उप-सचिव और निदेशक पदों पर निजी क्षेत्र के 40 विशेषज्ञ नियुक्त करने की तैयारी में है। कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसकी जानकारी राज्यसभा में दी है। जितेन्द्र सिंह ने राज्यसभा में एक पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि उपसचिव स्तर के दस पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन दिया गया था, जिसके लिए छह हजार आवेदन आये थे। संघ लोक सेवा आयोग ने इनमें से नौ लोगों का चयन किया है। 

सिंह ने कहा कि उम्मीदवारों के चयन में योग्यता से समझौता नहीं किया जायेगा। इन पदों पर आम तौर पर संघ लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित अधिकारियों या पदोन्नति प्राप्त केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों को रखा जाता है। केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि सरकार ने यह फैसला नीति आयोग के सुझाव पर किया है। जितेंद्र सिंह ने आगे कहा कि निजी क्षेत्र के ये विशेषज्ञ आईएएस अधिकारियों के साथ काम करेंगे और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर जरूरी फैसले लेने में भूमिका निभाएंगे। 

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उप सचिव और निदेशक पद पर IAS की ही होती है नियुक्ति

अभी तक उप सचिव और निदेशक स्तर पर केवल ग्रुप ए वाले आईएएस अधिकारी या फिर केंद्रीय सेवा से पदोन्नति किए गए अधिकारियों की नियुक्ति होती है। 

40 विशेषज्ञों की होगी नियुक्ति

फिलहाल ऐसे 40 विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी। इनको निश्चित अवधि के अनुबंध पर रखा जाएगा। नीति आयोग भी ऐसे विशेषज्ञों को उप सचिव से लेकर के संयुक्त सचिव के पद पर रखेगी। फिलहाल सरकार ऐसे लोगों को सलाहकार के पद पर नियुक्त कर रही है। 

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इतने समय के लिए होगी नियुक्ति

खबरों के अनुसार इनकी नियुक्ति तीन साल के लिए होगी और अगर अच्छा प्रदर्शन हुआ तो पांच साल तक के लिए इनकी नियुक्ति की जा सकती है। इनका वेतन केंद्र सरकार के अंतर्गत ज्वाइंट या फिर डिप्टी सचिव वाला होगा। सारी सुविधा उसी अनुरूप ही मिलेगी।

नीति आयोग की रिपोर्ट

नीति आयोग ने एक रिपोर्ट में यह रेखांकित किया है कि यह जरूरी है कि विशेषज्ञों को सीधे उच्च पदों पर निश्चित अवधि के अनुबंध पर व्यवस्था में शामिल किया जाए।

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गौरतलब है कि पीएम मोदी ने 22 जून को चुनिंदा अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ ‘आर्थिक नीति: आगे का रास्ता’ विषय पर विचार विमर्श किया था। इस बैठक का मकसद 2024 तक देश की अर्थव्यवस्था के आकार को दोगुना कर 5,000 अरब डॉलर पर पहुंचाने के लिए ऐसे विचारों पर चर्चा हुई जिनसे रोजगार सृजन, आर्थिक वृद्धि में मदद मिल सकती है। 

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