आखिर ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी कैसे होती है? और इससे कैसे बचें? समझिए

By कमलेश पांडे | Jun 29, 2026

क्या आपको पता है कि किसी भी अनजान मैसेज पर क्लिक करेंगे तो बैंक खाता हो सकता है खाली? जी हां,  आजकल यही हो रहा है। खासकर साइबर अपराधी फर्जी ई-चालान (E-Challan) के नाम पर एसएमएस (SMS), व्हाट्सऐप (WhatsApp) और ई-मेल (E-mail) भेजकर लोगों के बैंक खातों से पैसे उड़ा रहे हैं। 

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# समझिए, ठगी कैसे होती है?

फर्जी एसएमएस या व्हाट्सऐप संदेश- "आपका ₹2,000 का चालान बकाया है।"......"24 घंटे में भुगतान न करने पर कानूनी कार्रवाई होगी।".....नकली लिंक संदेश में दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही आप नकली वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं। वहां वाहन नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक विवरण या यूपीआई पिन (UPI PIN) मांगा जाता है। वहीं, मैलवेयर का खतरा भी रहता है क्योंकि कुछ लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में हानिकारक ऐप डाउनलोड हो जाता है। इससे ठग ओटीपी (OTP) बैंकिंग जानकारी और व्यक्तिगत डेटा चुरा सकते हैं।

# आखिर कैसे पहचानें फर्जी ई-चालान?

संदेश में भेजे गए लिंक का डोमेन संदिग्ध हो। अत्यधिक डराने या जल्द भुगतान का दबाव बनाया जाए। भुगतान के लिए निजी मोबाइल नंबर या UPI ID दी गई हो। वर्तनी और भाषा संबंधी कई गलतियां हों। आपने कोई ट्रैफिक नियम नहीं तोड़ा हो, फिर भी चालान का संदेश आए।

सुरक्षित रहने के उपाय: किसी भी एसएमएस या व्हाट्सऐप लिंक पर सीधे क्लिक न करें। ई-चालान की जांच केवल सरकारी पोर्टल पर करें। OTP, UPI PIN, CVV या बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें। मोबाइल में केवल आधिकारिक ऐप ही इंस्टॉल करें। संदिग्ध संदेश मिलने पर उसे रिपोर्ट करें और ब्लॉक करें।

# ई-चालान की जांच कहां करें?

भारत में ट्रैफिक चालान की वास्तविक स्थिति देखने के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का उपयोग करें: Parivahan eChallan Portal⁠. वहीं, यदि ठगी हो जाए तो क्या करें? तुरंत बैंक और यूपीआई (UPI) सेवा प्रदाता को सूचित करें। राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। फिर साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें: National Cyber Crime Reporting Portal.

# जानिए, आपका अधिकार क्या है?

यदि आप समय रहते 1930 पर शिकायत कर देते हैं, तो कई मामलों में संदिग्ध खाते में गई राशि को फ्रीज कराकर वापस पाने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें। हमेशा यह याद रखें कि कोई भी वैध सरकारी विभाग व्हाट्सऐप संदेश भेजकर आपसे ओटीपी, यूपीआई पिन या बैंक पासवर्ड नहीं मांगता। ई-चालान का संदेश मिलने पर पहले उसकी सत्यता जांचें, फिर ही कोई भुगतान करें।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

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