ममता के बंगाल में कितने लोग जिंदा जलकर मर गए? आनंदपुर के अग्नि कांड की कहानी पर मीडिया में इतना सन्नाटा क्यों

By अभिनय आकाश | Jan 30, 2026

चमकदार होर्डिंग्स, ललचाते हुए एड्स और सोशल मीडिया ट्रेंड से ब्रांड चमकाने वाली कंपनियों की हकीकत अक्सर तभी बाहर आती है जब कोई हादसा होता है। दो रोज पहले की बात है यानी कि 28 जनवरी की सुबह करीब 3:00 बजे कोलकाता के आनंदपुर इलाके में रूबी क्रॉसिंग के पास अचानक एक गोदाम में आग लग गई। कुछ ही मिनटों में यह आग दो बड़े गोदामों तक फैल गई। एक पुष्पांजल डेकोरेटर्स का गोडाउन और दूसरा वाओ मोमो कंपनी का लीज़ पर लिया हुआ वेयर हाउस। वाओ मोमो एक फास्ट फूड चेन है जिसके आउटलेट आप फूड डिलीवरी एप्स में देख सकते हैं। बंगाल का अग्निकांड इतना भयानक था कि अभी भी शवों की पहचान संभव नहीं हो सकी है। अधिकारियों के अनुसार, शव बहुत ही बुरी तरह जल चुके हैं। सिर्फ बड़ी हड्डियां और खोपड़ियां ही बची है। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस और राहत टीमें अब इन खोपड़ियों और हड्डियों को गिनकर मृतकों की संख्या का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं। यह आग 26 जनवरी को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में Wow! मोमो के गोदाम में लगी। आग लगने की वजहें अभी साफ नहीं हो सकी हैं। राहत दल मलबे और खंडहर में खोज कर रहे हैं ताकि और शव मिल सकें। आग में मृतकों की संख्या बढ़कर 21 पहुंच गई है। क्षतिग्रस्त इमारतों से 13 और शव बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, 28 लोग अब भी लापता हैं। आशंका है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती हैं। यह हादसा सिर्फ एक आग की घटना नहीं है बल्कि इसे कोलकाता के इतिहास की तीसरी सबसे बड़ी फायर ट्रेजडी माना जा रहा है। इससे पहले 2011 में एएमआरआई हॉस्पिटल में आग लग गई थी जिसमें 89 लोगों की मौत हो गई थी और 2010 में स्टीफन कोर्ट में भी आग लग गई थी जिसमें 43 लोगों की जान गई थी। उन दोनों घटनाओं की तरह आनंदपुर की यह घटना भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। खासकर सुरक्षा, लापरवाही और सिस्टम की नाकामी को लेकर। 

बॉडी के हिस्सों के डीएनए खोपड़ियों से मिलाए जाएंगे

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस भीषण आग में सिर्फ तीन लोग जिंदा बच पाए और ये तीनों वाओ मोमो के वेयर हाउस में काम करने वाले कर्मचारी बताए जा रहे हैं। बाकी लोग जो पुष्पांजलि डेकोरेटर्स के गोदाउन में थे आग और धुएं के बीच फंस गए। कई लोग बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसी दौरान वह बेहोश हो गए तो कईयों को रास्ता ही नहीं मिला। फरेंसिक विशेषज्ञों ने बताया कि जले हुए शवों से डीएनए सैंपल लेना मुश्किल हो सकता है। वजह यह है कि शव इतनी बुरी तरह जले हैं कि शरीर के अंदर मौजूद जेनेटिक मटीरियल खराब या नष्ट हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर की कुछ लंबी हड्डियां और गर्मी को ज्यादा सहन कर लेते है। इसलिए सावधानी और मेहनत से डीएनए सैपल जुटाना संभव हो सकता है। उन्होंने बताया कि बहुत ज्यादा जले हुए शवों से डीएनए लेना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लंबी हड्डियां और दांत अक्सर मिल जाते हैं, क्योंकि ये गर्मी से कम प्रभावित होते हैं। मेडिकल कॉलेज के फरेंसिक विभाग के प्रमुख का कहना है कि जले हुए शवों से मिली हड्डियां और दांत डीएनए जांच के लिए भरोसेमंद होते हैं। दांतों की ऊपरी परत (इनेमल) अंदर के गूदे को सुरक्षित रखती है, जिससे डीएनए बचा रहता है। वहीं, लंबी हड्डियां अपनी मजबूत बनावट के कारण तेज और लंबे समय तक की गर्मी को सहन कर लेती हैं। पुलिस ने ने बताया कि मृतकों की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट जरूरी है। अधिकारी ने कहा कि अलग-अलग बॉडी के हिस्सों के डीएनए खोपड़ियों से मिलाए जाएंगे। इससे पता लग सकेगा कि वे हिस्से किसी एक ही शख्स के हैं या अलग-अलग व्यक्ति के हैं। घटना स्थल पर मौजूद पुलिस ने बताया कि आग के समय कुछ कर्मचारी सामने की ओर भागने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कुछ पीछे की ओर भागे, लेकिन कोई नहीं बच सका। फरेंसिक एक्सपर्ट खोपड़ियों और हड्डियों से डीएनए के सैपल इकट्ठा कर रहे हैं ताकि मृतकों की पहचान हो सके और उनके परिवार को जानकारी दी जा सके। 

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इलाके में कर्फ्यू, शुभेदु पहुंचे हाई कोर्ट

फॉरेंसिक और पुलिस जांच में भी यह साफ हो गया कि आग बगल के गोदाम से आई थी। हमारा वेयर हाउस किराए पर था और मकान मालिक का ही वो डेकोरेटर गोदाम था जहां से आग शुरू हुई। हालांकि कंपनी अपनी सफाई दे रही है लेकिन सवाल वही है कि क्या इतने बड़े ब्रांड को ऐसे असुरक्षित परिसर में अपना सामान स्टोर करना चाहिए था जहां फायर सेफ्टी का कोई ऑडिट नहीं हुआ था। लाइसेंस और एनओसी सिर्फ कागजों पर लेकर काम चलाया जा रहा था। अभी 13 लोगों की जान चली गई है। अगर अभी इंडस्ट्रियल इलाकों में फायर सेफ्टी को गंभीरता से नहीं लिया गया तो अगली बार फिर किसी ब्रांड के पीछे इंसानी जान की बलि चढ़ सकती है।  वहीं विपक्ष के नेता शुभेदु अधिकारी और बीजेपी के अन्य नेताओ के प्रस्तावित दौरे से पहले अधिकारियों ने इलाके में कर्फ्यू लागू कर आम लोगो की आवाजाही बैन कर दी है। शुभेदु अधिकारी ने घटनास्थल पर जाने और पास के एक मंदिर से वहा तक मार्च निकालने की अनुमति के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट कोर्ट का रुख किया है। सूत्र के मुताबिक मामले की सुनवाई जस्टिस शुभ्रा घोष कर सकती है।

मौत के आंकड़े को लेकर इतना संशय क्यों?

पश्चिम बंगाल के यूट्यूबर पाथ चटर्जी का दावा है कि 50 लोग से ज्यादा मरे हैं। सोचिए अगर यही हाल देश के किसी दूसरे राज्य में इस तरह की घटना होती तो क्या रिएक्शन होता? अब तक हंगामा हो चुका होता। मान लीजिए कि आपके उत्तर प्रदेश में 50 लोग जिंदा जलकर मर गए। क्या हाल होता। हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 23 लाशें बरामद की जा चुकी है। बाकी 22 या 23 का कोई पता नहीं। अभी उनकी उनको ढूंढने की कोशिश जारी है।

वाओ मोमो ने एक ऑफिशियल प्रेस स्टेटमेंट जारी किया है। उस स्टेटमेंट में वाओ मोमो नाम की कंपनी द्वारा यह कहा गया है कि हमारे तीन वैलुएबल एंप्लई की डेथ हो गई है। हम उन तीनों को 10 ₹1 लाख मुआवजा देंगे और लाइफ टाइम सैलरी देंगे और उनके जो बच्चे हैं उनके पढ़ने का इंतजाम करेंगे। हम सुनते थे बहुत पहले दिल्ली में उपहार सिनेमा हॉल में आग लगी थी और वह पूरा प्रकरण बहुत उस कई काफी दिनों तक मीडिया में छाया रहा था। 

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