दुनिया में ईसाई, इस्लामिक, यहूदी और बौद्ध राष्ट्र हो सकते हैं तो Hindu Rashtra क्यों नहीं हो सकताः Annu Kapoor

By नीरज कुमार दुबे | Feb 21, 2026

जाने माने अभिनेता अनु कपूर ने राष्ट्रवाद और हिंदू राष्ट्र की बहस को केंद्र में ला खड़ा किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह श्लोक गाने के निर्देश का उन्होंने खुलकर स्वागत करते हुए इसे “अद्भुत और ऐतिहासिक निर्णय” बताया है। अनु कपूर ने कहा कि यह राष्ट्र की चेतना के लिए शुभ संकेत है। अनु कपूर ने साथ ही वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत को शांति, करुणा और विश्वकल्याण का संदेश देने वाला बताते हुए कहा कि भारतीय सभ्यता की आत्मा अहिंसा और सहअस्तित्व में विश्वास करती है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की कामना करने वाला समाज किसी के लिए खतरा कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि अगर हिंदू प्रार्थना करता है तो वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समूचे विश्व के लिए मंगलकामना करता है। ऐसे में हिंदू पहचान से डर क्यों? उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू-मुस्लिम विभाजन की कथित खाई दरअसल राजनीतिक स्वार्थों की उपज है।

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दूसरी ओर, अनु कपूर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल फिर उठने लगा है कि क्या भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए? देखा जाये तो भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक जड़ें हिंदू सभ्यता में निहित हैं। यहां की परंपराएं, त्योहार, जीवन-दर्शन और सामाजिक संरचना उसी धरोहर से निर्मित हुए हैं। हिंदू राष्ट्र का अर्थ किसी अन्य धर्म के प्रति घृणा नहीं, बल्कि उस मूल सांस्कृतिक पहचान को संवैधानिक स्वीकृति देना है, जिसने इस भूमि को आकार दिया।

यह भी सत्य है कि “धर्मनिरपेक्षता” की आड़ में अक्सर तुष्टिकरण की राजनीति ने बहुसंख्यक समाज को अपराधबोध में जीने पर मजबूर किया है। यदि भारत स्वयं को हिंदू राष्ट्र घोषित करता है, तो इसका संदेश होगा कि यह राष्ट्र अपनी जड़ों पर गर्व करता है। यह वैसा ही होगा जैसे कई इस्लामी या ईसाई राष्ट्र अपनी धार्मिक पहचान के साथ भी लोकतांत्रिक ढांचा बनाए रखते हैं। इसके अलावा, हिंदू राष्ट्र की अवधारणा सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ कर सकती है। जब पहचान स्पष्ट होती है, तब भ्रम कम होता है। अनु कपूर का आह्वान इसी स्पष्टता की मांग करता है यानि धर्म, जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जाए, लेकिन अपनी मूल पहचान से समझौता किए बिना।

जहां तक हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर आरएसएस के विचार की बात है तो हम आपको बता दें कि संघ प्रमुख मोहन भागवत समय समय पर यह स्पष्ट करते रहे हैं कि भारत प्राचीन काल से ही हिंदू राष्ट्र है भले संविधान में इस प्रकार का कोई औपचारिक दर्जा ना हो लेकिन भारत हिंदू राष्ट्र ही है।

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