By रेनू तिवारी | Sep 21, 2026
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे में पिछले तीन दिनों से चल रहा गंभीर प्रशासनिक गतिरोध रविवार देर रात एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद जवाबदेही और व्यवस्थागत सुधारों की मांग को लेकर मुख्य गेट पर धरना दे रहे प्रदर्शनकारी छात्रों की 18-सूत्रीय मांगों के चार्टर को संस्थान प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है। लगभग तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद IIT बॉम्बे के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे ने छात्रों द्वारा प्रस्तुत मांगों के ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चार्टर पर हस्ताक्षर करने का मतलब हर मांग पर तुरंत फैसला होना नहीं है, बल्कि मामले को तय कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत निपटाया जाएगा।
यह समझौता 18 सितंबर की शाम को 22 वर्षीय छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या से हुई मौत के बाद जवाबदेही की बढ़ती माँगों के बीच हुआ। प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँगों में प्रोफ़ेसर सूर्यनारायण डूला के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग भी शामिल है, जो उस परीक्षा में इनविजिलेटर (निरीक्षक) थे जिसमें वाकोडे ने अपनी मौत से कुछ समय पहले हिस्सा लिया था। प्रदर्शनकारियों के साथ बैठक के दौरान, जब यह मुद्दा उठाया गया, तो केदारे को यह कहते हुए सुना गया कि संस्थान "प्रक्रिया का पालन करेगा"।
बाद में संस्थान के एक अधिकारी ने संकेत दिया कि मामले को उचित प्रक्रिया के ज़रिए निपटाया जाएगा, जिसका मतलब था कि चार्टर पर हस्ताक्षर करने का मतलब हर व्यक्तिगत माँग पर तुरंत फ़ैसला लेना नहीं था।
देर रात हुई यह घटनाक्रम प्रदर्शनकारी छात्रों और IIT-बॉम्बे प्रशासन के वरिष्ठ सदस्यों के बीच लगभग तीन घंटे की बातचीत के बाद हुआ।
इस चार्टर में वाकोडे की मौत की जाँच के साथ-साथ संस्थान की शैक्षणिक, अनुशासनात्मक और छात्र-कल्याण प्रणालियों में व्यापक बदलाव की माँगें भी शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी चल रहे हैं जिनमें कथित तौर पर IIT-बॉम्बे के डायरेक्टर का इस्तीफ़ा दिखाया गया है। हालाँकि, इस मामले को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इंडिया टुडे इन वीडियो की प्रमाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने का दावा नहीं करता है।20 सितंबर की शाम को, सूत्रों ने उन कदमों की ओर इशारा किया था जो IIT-बॉम्बे प्रबंधन द्वारा उठाए जाने की उम्मीद थी, जिसमें IIT-बॉम्बे के डायरेक्टर का संभावित इस्तीफ़ा भी शामिल था।
18-सूत्रीय चार्टर
हालाँकि, 18-सूत्रीय चार्टर डूला के निलंबन के सवाल से कहीं आगे जाता है। छात्रों ने वाकोडे की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की स्वतंत्र जाँच की माँग की है, जिसमें 30 सितंबर तक अंतरिम रिपोर्ट और 15 अक्टूबर तक अंतिम रिपोर्ट की माँग शामिल है।
उन्होंने डायरेक्टर, डीन ऑफ़ स्टूडेंट अफ़ेयर्स और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक 'ओपन हाउस' (खुली चर्चा) की भी माँग की है, साथ ही उस घटना के लिए माफ़ी की माँग की है जिसे उन्होंने वाकोडे की सार्वजनिक "बदनामी" बताया था। इंडिया टुडे डिजिटल टीम को मिले इस दस्तावेज़ में चार्टर में बताई गई कुछ मुख्य मांगों की जानकारी है। कई मांगें सिस्टम में बदलाव पर केंद्रित हैं।
इनमें प्रोफ़ेसरों के लिए आचार संहिता, फैकल्टी और स्टाफ़ को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाना, आमने-सामने की काउंसलिंग में सुधार, अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति की प्रक्रिया में बदलाव और संस्थान के फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में छात्रों की ज़्यादा भागीदारी शामिल है।
छात्रों ने छात्रों, फैकल्टी सदस्यों, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों और बाहरी विशेषज्ञों की एक टास्क फ़ोर्स बनाने का भी प्रस्ताव दिया है, जो छात्रों की परेशानी की जांच करे और बचाव के उपाय सुझाए।
उन्होंने बेहतर मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाओं की मांग की है, जिसमें संस्थान के अस्पताल में 24 घंटे साइकियाट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) की सुविधा शामिल है। चार्टर में 26 सितंबर तक लिखित रूप में लागू करने की योजना और इस बात का भरोसा भी मांगा गया है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले छात्रों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
छात्रों ने यह भी मांग की है कि अगर प्रस्तावित सुधार एक महीने के भीतर लागू नहीं किए जाते हैं, तो डायरेक्टर इस्तीफ़ा दे दें।
धोखाधड़ी, आत्महत्या और सस्पेंशन
वाकोडे के माता-पिता की शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज FIR में प्रोफ़ेसर डूला का नाम शामिल है।
परिवार द्वारा जाति-आधारित उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं लगाई हैं। इसके बाद जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है।
डूला के ख़िलाफ़ कार्रवाई की छात्रों की मांग वाकोडे से जुड़ी परीक्षा की घटना के बाद आई है। एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष के छात्र को शुक्रवार को मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते हुए पाया गया था।
IIT-बॉम्बे ने कहा कि उसने जवाब पाने के लिए प्रश्न पत्र को एक AI प्लेटफ़ॉर्म पर अपलोड किया था और कहा कि उसके ख़िलाफ़ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।
संस्थान ने कहा कि छात्र की काउंसलिंग की गई और उसे भरोसा दिलाया गया कि इस घटना का उसके शैक्षणिक करियर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
बाद में वाकोडे अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए। IIT-बॉम्बे ने जाति-भेदभाव के आरोप से इनकार किया है और कहा है कि वाकोडे ने संस्थान के SC/ST सेल या प्रशासन को ऐसी कोई शिकायत नहीं दी थी।
इस बीच, IIT-बॉम्बे के फैकल्टी फ़ोरम ने सार्वजनिक रूप से डूला का समर्थन करते हुए कहा है कि वे संस्थान की मंज़ूर शैक्षणिक प्रक्रियाओं के अनुसार अपनी इनविजिलेशन (निरीक्षण) की ड्यूटी निभा रहे थे। फ़ोरम ने कहा कि उसे उनकी प्रतिष्ठा को "धूमिल" किए जाने की चिंता है और इस बात पर ज़ोर दिया कि उन्होंने परीक्षा में कथित गड़बड़ी की सूचना तय प्रक्रिया के ज़रिए दी थी।