सामने थे घुसपैठिये, तभी आ गयी BSF, Border पर तगड़ा बवाल, Bangladeshi Infiltrators के खिलाफ एक्शन के दौरान दोनों ओर जुट गई भारी भीड़

By नीरज कुमार दुबे | Jun 26, 2026

असम से लेकर पश्चिम बंगाल की सीमा तक अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ अब निर्णायक कार्रवाई का दौर शुरू हो चुका है। गुवाहाटी और भारत बांग्लादेश सीमा पर हाल में घटी घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब भारत की धरती सुरक्षित शरणस्थली नहीं बनने दी जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी सख्त कार्रवाई के जरिये यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि बिना वैध दस्तावेज भारत में घुसने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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इस पूरे मामले में उस सराय के संचालक हृदय डेका की भूमिका भी जांच के घेरे में है, जहां ये लोग ठहरे हुए थे। आरोप है कि सराय संचालक ने नियमों के अनुसार ठहरने वालों की पहचान का सत्यापन नहीं किया। यह लापरवाही केवल कानूनी उल्लंघन नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जा रहा है।

इससे कुछ दिन पहले ही 19 जून को भी गुवाहाटी के आर्य नगर इलाके से तेरह संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए थे। वे भी कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सके थे और जांच पूरी होने के बाद उन्हें भी वापस भेज दिया गया था। देखा जाये तो लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से साफ है कि असम में सुरक्षा एजेंसियां अब पूरी सतर्कता के साथ अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चला रही हैं।

उधर, पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के तपन ब्लाक स्थित लक्ष्मीनारायणपुर सीमा क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यहां भारत बांग्लादेश सीमा पर लगभग तीस लोग जीरो प्वाइंट पर फंसे रहे। मामला तब बिगड़ा जब भारत की ओर से छत्तीस बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजने की पहल की गई, लेकिन सीमा सुरक्षा बल की मौजूदगी में पहुंचे इन लोगों को बांग्लादेश सीमा रक्षक बल ने स्वीकार करने से इंकार कर दिया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया।

सूत्रों के अनुसार देर रात बांग्लादेश की ओर से कुछ लोगों को फिर भारतीय सीमा में धकेलने की कोशिश की गई, लेकिन सीमा सुरक्षा बल ने सख्त रुख अपनाते हुए इस प्रयास को नाकाम कर दिया। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि बांग्लादेश की ओर तीन सौ से अधिक लोग जमा होकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। जवाब में भारतीय सीमा गांवों के लोग भी सीमा के पास डटे रहे और पूरी स्थिति पर नजर बनाए रखी।

दिन भर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई चरणों में बैठकें हुईं, लेकिन देर शाम तक कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आ सका। हम आपको बता दें कि यह इलाका लंबे समय से अधूरी सीमा बाड़ और भूमि विवादों के कारण घुसपैठ के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। अब प्रशासन सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए तेजी से जमीन हस्तांतरण और बाड़ निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।

इसके अलावा, सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच भारत बांग्लादेश संबंध अब नए दौर की खींचतान में प्रवेश करते दिखाई दे रहे हैं। बांग्लादेश की नई सरकार के सत्ता में आने के बाद शुरुआत में रिश्तों में सुधार की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब सीमा प्रबंधन, अवैध घुसपैठ, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और नदी जल बंटवारे जैसे मुद्दों ने दोनों देशों के बीच तल्खी बढ़ा दी है। बांग्लादेश लगातार भारत पर सीमा पर धक्का देकर लोगों को भेजने और बाड़ निर्माण में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहा है, जबकि भारत स्पष्ट कर चुका है कि अवैध घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। संयुक्त राष्ट्र तक ने सीमा तनाव पर चिंता जताई है। ऐसे माहौल में यह सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर बांग्लादेश अपनी धरती से होने वाली घुसपैठ और कट्टरपंथी तत्वों पर कब लगाम लगाएगा?

साथ ही स्थिति को और संवेदनशील बना रही है चीन की तेजी से बढ़ती सक्रियता। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपने पहले विदेशी दौरे के लिए चीन को चुनकर साफ संकेत दिया है कि ढाका अब नई सामरिक दिशा में आगे बढ़ रहा है। हम आपको बता दें कि तारिक रहमान के चीन दौरे के दौरान मोंगला बंदरगाह के पास जिस आर्थिक क्षेत्र को पहले भारत के लिए चिन्हित किया गया था, अब वहां चीन की सरकारी कंपनी को परियोजना सौंप दी गई है। यही नहीं, तीस्ता नदी परियोजना में भी चीन की भागीदारी भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाने वाली मानी जा रही है, क्योंकि यह इलाका सिलीगुडी गलियारे जैसे बेहद संवेदनशील क्षेत्र के करीब है। हिंद महासागर में चीन पहले ही कई बंदरगाह परियोजनाओं के जरिए अपना प्रभाव बढ़ा चुका है और अब बांग्लादेश में उसकी पैठ भारत के लिए नई रणनीतिक चुनौती बनती जा रही है।

बहरहाल, इन घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ अब केवल सीमा पार चोरी छिपे प्रवेश का मामला नहीं रह गया, बल्कि यह भारत की आंतरिक सुरक्षा, जनसांख्यिक संतुलन और सामरिक हितों से जुड़ा गंभीर खतरा बन चुका है। सीमा पर लगातार बढ़ती सख्ती और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि भारत अब घुसपैठियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर आगे बढ़ रहा है। जो लोग भारत की सीमा को कमजोर कड़ी समझकर यहां घुसने की कोशिश करेंगे, उन्हें पहचान कर वापस भेजा जाएगा और उनके मददगारों पर भी कठोर कार्रवाई होगी। साथ ही चीन के बढ़ती दखल और बांग्लादेश की बदलती रणनीतिक दिशा ने भारत के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे समय में देश को मजबूत सीमा सुरक्षा, तेज कूटनीतिक रणनीति और कठोर आंतरिक निगरानी के साथ आगे बढ़ना होगा, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई विरोधी ताकत किसी प्रकार का खिलवाड़ ना कर सके।

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