Bangladeshi Infiltrators की खैर नहीं, Bengal, Assam, Gujarat ने घुसपैठियों के खिलाफ अभियान और तेज किया

Bangladeshi Infiltrators
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बांग्लादेश ने फिर आरोप लगाया है कि भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने नौ लोगों को बांग्लादेश में भेजने की कोशिश की। बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड ने दावा किया कि नौगांव के सपाहार सीमा क्षेत्र में तीन पुरुष, तीन महिलाएं और तीन बच्चों को जीरो लाइन के पास रोका गया।

ढाका से लेकर गुवाहाटी और गुजरात तक फैले बांग्लादेशी घुसपैठ के जाल ने एक बार फिर देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीमा पर लगातार सख्ती के बावजूद घुसपैठियों के गिरोह नए रास्ते, नए दलाल और नए फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में दाखिल होने की कोशिश कर रहे हैं। हालात इतने चिंताजनक हो चुके हैं कि अब यह केवल अवैध प्रवेश का मामला नहीं रह गया, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और कानून व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बन चुका है।

ताजा घटना की बात करें तो आपको बता दें कि बांग्लादेश ने फिर आरोप लगाया है कि भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने नौ लोगों को बांग्लादेश में भेजने की कोशिश की। बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड ने दावा किया कि नौगांव के सपाहार सीमा क्षेत्र में तीन पुरुष, तीन महिलाएं और तीन बच्चों को जीरो लाइन के पास रोका गया। बांग्लादेशी बलों का कहना है कि उनकी कड़ी चौकसी के कारण इन लोगों को देश में घुसने नहीं दिया गया और वे सीमा पर ही फंसे रहे। इस पूरे मामले पर भारतीय पक्ष की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया, लेकिन यह घटना सीमा पर लगातार बढ़ रही हलचल को साफ दिखाती है।

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इसी बीच, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में सीमा पर ड्यूटी कर रहे सीमा सुरक्षा बल के जवान विनीत कुमार दुबे की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई। उत्तर प्रदेश के कन्नौज निवासी विनीत कुमार दुबे देर रात भारी बारिश और तूफान के बीच भारत बांग्लादेश सीमा के खुले इलाके में निगरानी कर रहे थे। बिजली गिरते ही वह गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई। यह घटना बताती है कि सीमा की रक्षा में लगे जवान किस तरह हर पल जान जोखिम में डालकर देश की सुरक्षा कर रहे हैं।

दूसरी ओर गुजरात सरकार की ओर से चलाया गया "ऑपरेशन डेल्टा हंट" देश के इतिहास में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है। अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट और भरूच समेत कई शहरों में एक साथ छापेमारी कर पांच सौ से ज्यादा संदिग्ध घुसपैठियों को पकड़ा गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह केवल अवैध प्रवेश का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे मानव तस्करी, फर्जी पहचान पत्र, हवाला जैसे पैसों के नेटवर्क और अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय हैं।

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, जांच में खुलासा हुआ है कि घुसपैठ के दो मुख्य रास्ते इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पहला पश्चिम बंगाल का सीमा क्षेत्र और दूसरा मेघालय, मिजोरम, असम तथा त्रिपुरा से जुड़ा पूर्वोत्तर मार्ग। घुसपैठिये खेतों, जंगलों और नदी मार्गों से रात के अंधेरे में भारत में दाखिल होते हैं। कई बार नावों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि सुरक्षा बलों की नजर से बचा जा सके। सीमा पार करने के बाद दलाल इन्हें अलग अलग राज्यों तक बस और रेल के जरिये पहुंचाते हैं।

सबसे खतरनाक पहलू यह है कि यह पूरा नेटवर्क दोनों देशों में बैठे एजेंटों के सहयोग से चलता है। बांग्लादेश में एजेंट लोगों को इकट्ठा करते हैं, सीमा तक पहुंचाते हैं और भारतीय एजेंट आगे की व्यवस्था संभालते हैं। फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और यहां तक कि भारतीय पासपोर्ट तक तैयार करा दिए जाते हैं। कई मामलों में घुसपैठिये भारत आने के बाद अपने मूल बांग्लादेशी दस्तावेज नष्ट कर देते हैं ताकि पहचान साबित करना मुश्किल हो जाए।

जांच एजेंसियों का कहना है कि गरीबी और बेरोजगारी का फायदा उठाकर एजेंट बांग्लादेशी परिवारों को भारत में बेहतर कमाई का सपना दिखाते हैं। महिलाओं को घरेलू काम और ब्यूटी पार्लरों में नौकरी का लालच दिया जाता है, जबकि युवकों को मजदूरी और दूसरे कामों का भरोसा दिया जाता है। लेकिन कई मामलों में महिलाओं को देह व्यापार जैसे गंदे धंधों में धकेले जाने की बात भी सामने आई है। एजेंटों का मकसद केवल पैसा कमाना होता है और इसके लिए वह मानवता तक को बेचने से पीछे नहीं हटते।

इस बीच, गुवाहाटी में भी लगातार बांग्लादेशियों की गिरफ्तारी ने घुसपैठियों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में पुलिस ने एक लॉज से दस बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा, जिनमें महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल था। पूछताछ में सामने आया कि वे स्थानीय दलालों की मदद से सीमा पार कर भारत पहुंचे थे और फर्जी भारतीय दस्तावेज मिलने का इंतजार कर रहे थे। इससे पहले भी गुवाहाटी में कई जगहों से संदिग्ध घुसपैठियों को हिरासत में लिया जा चुका है। केवल पंद्रह दिनों में तैंतीस बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।

देखा जाये तो अब समय आ गया है कि देश में घुसपैठ के खिलाफ चल रही कार्रवाई और तेज की जाये। जो लोग अवैध तरीके से भारत की सीमा में दाखिल होकर यहां की व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं, उन्हें यह साफ संदेश मिलना चाहिए कि भारत कोई खुला मैदान नहीं है। सीमा की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों, फर्जी दस्तावेज बनाने वालों और देश की जनसांख्यिकीय संरचना बिगाड़ने की साजिश करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई जरूरी है।

बांग्लादेशी घुसपैठियों और उनके मददगारों को यह चेतावनी समझ लेनी चाहिए कि अब देश की सुरक्षा एजेंसियां पूरी ताकत के साथ सक्रिय हैं। सीमा पार कर भारत में अवैध रूप से घुसने की हर कोशिश नाकाम की जाएगी और कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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