By अभिनय आकाश | Sep 11, 2025
इजरायल ने हमास के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कतर के दोहा में एक बड़ा हमला किया था। इस हमले में हमास के पोलित ब्यूरो के सदस्यों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। इसके बाद मामला बिगड़ गया। कतर ने न सिर्फ इजरायल के इस हमले की निंदा की बल्कि ये तक कह दिया कि उसके पास इस तरह की कार्रवाई का जवाब देने का पूर्ण तरीके से अधिकार है। मामला लगातार बिगड़ता जा रहा है। एक घटना इससे जुड़ी भारत में भी हुई। भारत के प्रधानमंत्री की बातचीत कतर के अमीर शेख तमीम बिन थानी से हुई है। ऐसा लगता है कि भारत ने पहली बार इजरायल के इस तरह के हमले की खुलकर निंदा की है। प्रधानमंत्री मोदी ने दोहा में हुए हमलो की चिता व्यक्त की। इसे लेकर उन्होंने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से बातचीत की।
हमास ने एक बयान में कहा कि उसके शीर्ष नेता हमले में बच गए, हालांकि संगठन ने अब तक कोई प्रमाण नहीं दिया है। हमले में मारे गए लोगों में हमास के वरिष्ठ नेता और प्रमुख वार्ताकार खलील अल-हैय्या के बेटे, तीन अंगरक्षक और उनके कार्यालय प्रमुख शामिल हैं। गाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजराइल की जवाबी सैन्य कार्रवाई में अब तक 64,600 से अधिक फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं।
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल सानी ने कहा है कि इजराइल द्वारा दोहा में हमास नेताओं को निशाना बनाकर किए गए हमले से इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ग़ाज़ा में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई की हर उम्मीद खत्म कर दी है। शेख मोहम्मद ने यह तीखा बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी उपस्थिति से पूर्व दिया। यह इजराइली हमले को लेकर खाड़ी देशों, विशेष रूप से अरब देशों के भीतर गहराते असंतोष को दर्शाता है। इस हमले में कम से कम छह लोगों की मौत हुई थी। सीएनएन को बुधवार देर रात दिए गए एक साक्षात्कार में शेख मोहम्मद ने कहा कि हमले के दिन सुबह मैं एक बंधक के परिवार से मिला था। वे लोग संघर्षविराम और मध्यस्थता पर पूरी तरह निर्भर थे। उनके पास कोई और आशा नहीं थी। लेकिन मुझे लगता है कि नेतन्याहू ने जो किया, उससे उन बंधकों की रिहाई की हर उम्मीद समाप्त हो गई है।